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भारतीय बीज सहकारी समिति: बीज क्षेत्र में बड़ी पहल

महज तीन वर्षों में BBSSL ने सहकारिता आधारित बीज कारोबार को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई, किसानों की भागीदारी से बीज आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

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अजीत सिंह

भारत में कृषि उत्पादकता बढ़ाने की चर्चा जब भी होती है, तो सबसे पहले गुणवत्तापूर्ण बीजों का महत्व सामने आता है। अच्छी क्वालिटी के बीज किफायती दामों पर मिलना आज भी किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2023 में स्थापित भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) देश के बीज क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संस्था के रूप में उभर रही है। केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय स्तर पर गठित इस बहुराज्यीय सहकारी समिति ने किसानों को प्रमाणित और उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन को उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है और इस साल के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं। BBSSL को सहकारी क्षेत्र की पांच दिग्गज संस्थाओं इफको, कृभको, नैफेड, एनडीडीबी और एनसीडीसी द्वारा प्रमोट किया गया है। इसका मकसद सहकारी नेटवर्क के माध्यम से घरेलू बीज उत्पादन को बढ़ावा देना तथा किसानों को उच्च गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराना है।

 

रूरल वर्ल्ड के साथ खास बातचीत में भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड के प्रबंध निदेशक चेतन जोशी ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में बीबीएसएसएल ने लगभग 227 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया जो इससे पिछले साल करीब 55 करोड़ रुपये था। सबसे खास बात यह है कि देश के 14 राज्यों में समिति के बीज की बिक्री हुई और विगत वर्ष से करीब 2 गुना अधिक मात्रा में उन्नत बीज किसानों तक पहुंचा। जोशी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2026-27 में समिति का लक्ष्य 600 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करना और सरकारी योजनाओं और रिटेल नेटवर्क के माध्यम से देश के सभी राज्यों के किसानों तक बीज पहुंचना है। BBSSL का एक अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्य स्वदेशी एवं पारंपरिक बीजों का संरक्षण और संवर्धन भी है।  

 

2025-26: उपलब्धियों का वर्ष

 

वित्त वर्ष 2025-26 BBSSL के लिए उल्लेखनीय उपलब्धियों का वर्ष रहा। संस्था ने देशभर में सहकारी नेटवर्क के माध्यम से विगत वर्ष 15 फसलों के 32,409 टन बीजों का वितरण किया, वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए 27 फसलों के 76 हजार टन बीजों के वितरण का लक्ष्य रखा गया है। यह दर्शाता है कि मात्र तीन वर्षों में संस्था ने बीज उत्पादन के साथ देश भर में प्रभावी वितरण तंत्र विकसित कर लिया है। जोशी बताते हैं कि फिलहाल समिति के पास 17 राज्यों में बीज बिक्री का लाइसेंस है और इस साल अन्य राज्यों में भी बीज बिक्री के लाइसेंस प्राप्त कर वितरण नेटवर्क को विस्तार दिया जाएगा।

 

वर्ष 2025-26 में BBSSL द्वारा सर्वाधिक 17583 टन गेहूं के बीज की आपूर्ति की गई। दूसरे स्थान पर 7036 टन बीज मूंगफली और 2968 टन बीज धान का वितरित किया गया। राजस्व की दृष्टि से सर्वाधिक 88 करोड़ रुपये की आय मूंगफली बीज से हुई जबकि गेहूं से लगभग 67 करोड़ और धान से 11.7 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ। समिति ने दलहन के बीज भी किसानों को उपलब्ध कराए। समिति द्वारा सर्वाधिक बीजों की आपूर्ति उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में की गई। जोशी बताते हैं कि चालू वित्त वर्ष के दौरान दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत के बाकी राज्यों में बीज लाइसेंस प्राप्त कर वितरण नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।  

 

सहकारिता आधारित बीज मॉडल

 

समिति सहकारी नेटवर्क के माध्यम से किसानों को बीज उत्पादन प्रक्रिया से जोड़कर उन्हें अतिरिक्त आय का अवसर भी उपलब्ध करा रही है। चेतन जोशी बताते हैं कि अब तक कुल 37 हजार से अधिक प्राथमिक कृषि क्रेडिट समितियां (PACS), किसान उत्पादक संगठन (FPOs) तथा अन्य सहकारी संस्थाएं बीबीएसएसएल की सदस्य बन चुकी हैं। उनका कहना है कि सदस्य संख्या के लिहाज से यह देश की सबसे बड़ी सहकारी समिति है। समिति का मॉडल बीज उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, प्रमाणन और विपणन की पूरी श्रृंखला को सहकारी ढांचे में जोड़ता है। इससे बीज उत्पादन और वितरण की एक सहकारी व्यवस्था खड़ी हो रही है, जिसके केंद्र में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य है।

 

जोशी बताते हैं कि बीज वितरण से जुड़ी सरकारी योजनाओं और रिटेल नेटवर्क यानी बीज की दुकानों के जरिए किसानों तक उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बीज उत्पादन के लिए ब्रीडर बीज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), स्टेट एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और देश-विदेश के जाने-माने शोध संस्थानों से लिए जाते हैं। जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के मद्देनजर क्लाइमेट-रेज़िलिएंट, पेस्ट-रेसिस्टेंट और डिजीज-रेसिस्टेंट बीज किस्में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा, सीड रिप्लेसमेंट रेट (SRR) और वैरायटी रिप्लेसमेंट रेट (VRR) को बढ़ाना तथा QR कोड-बेस्ड ट्रेसेबिलिटी सिस्टम के ज़रिए पारदर्शिता को बढ़ाना भी बीबीएसएसएल की रणनीति का हिस्सा है।

 

बीज अनुसंधान पर फोकस

 

बीबीएसएसएल ने पूर्वी गोदावरी (आंध्र प्रदेश), जलगांव (महाराष्ट्र) और बाराबंकी (उत्तर प्रदेश) में केले के लिए टिश्‍यू कल्चर लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे किसानों को रोगमुक्त पौध/रोपण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसी तरह आलू के उच्च गुणवत्ता बीज उत्पादन के लिए बीबीएसएसएल और बनस डेयरी ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी के तहत टिश्यू कल्चर और एरोपोनिक सुविधाओं का उपयोग कर गुणवत्ता वाले आलू बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

बीज अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन के लिए गुजरात के कलोल में एक अत्याधुनिक बीज अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जा रही है। इसके लिए बीबीएसएसएल ने नॉलेज पार्टनर के तौर पर इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT) के साथ एमओयू किया है। BBSSL के प्रबंध निदेशक चेतन जोशी कहते हैं कि सहकारिता केवल एक व्यावसायिक मॉडल नहीं बल्कि किसानों को स्वामित्व देने का माध्यम है। बीज उत्पादन में किसानों की भागीदारी बढ़ाकर ही आत्मनिर्भर और टिकाऊ बीज प्रणाली विकसित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि BBSSL का उद्देश्य केवल बीजों का उत्पादन और वितरण नहीं, बल्कि किसानों के लिए एक सशक्त, विश्वसनीय और टिकाऊ बीज इको-सिस्टम तैयार करना है।

 


अजीत सिंह

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