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एपीडा ने किसानों के लिए खोले निर्यात के रास्ते

एपीडा की मदद स देश के विभिन्न राज्यों सेविशिष्ट कृषि उत्पादों के पहली बार निर्यात की पहल, किसानों को मिला बहतर दाम

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अजीत सिंह

भारतीय कृषि निर्यात अब केवल बल्क कमोडिटी तक सीमित नहीं रह गया है। देश के विभिन्न राज्यों से प्रीमियम फल, मोटे अनाज, जीआई टैग प्राप्त उत्पाद और मूल्य संवर्धित खाद्य पदार्थ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की पहल से देश के कई कृषि उत्पादों का पहली बार निर्यात हुआ है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर खुल रहे हैं।

 

इस बदलाव का प्रमुख वाहक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्यरत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) है, जो किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और कृषि उद्यमियों को वश्विै क खरीदारों से जोड़कर निर्यात के नए रास्ते खोल रहा है। वर्ष 2026 के दौरान एपीडा ने विभिन्न राज्यों से कई उत्पादों की पहली निर्यात खेप भेजने में महत्वपर्ण ू भूमिका निभाई।

 

एपीडा के प्रयासों से कृषि निर्यात के लिए आवश्यक अवसंरचना, गुणवत्ता प्रमाणन और ट्से रे बिलिटी प्रणाली लगातार मजबूत हो रही है। इसके परिणामस्वरूप कई कृषि उत्पाद पहली बार संयक्तु अरब अमीरात (यूएई), ओमान, ऑस्ट्रिया, इराक, न्यूजीलैंड और अमेरिका जैसे प्रीमियम वश्विै क बाजारों तक पहुंचे, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ। कई मामलों में किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में 40 से 180 प्रतिशत तक अधिक कीमत मिली।

 

एपीडा की भूमिका केवल निर्यात को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं रह गई है। वह किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों, प्रसंस्करण इकाइयों, निर्यातकों और विदेशी रिटेल कंपनियों को जोड़ते हुए एक समग्र निर्यात इकोसिस्टम विकसित कर रहा है।

 

ये पहलें वश्विै क उपभोक्ताओं की बदलती पसंद को भी दर्शाती हैं। दुनिया भर में स्वास्थ्यवर्धक, टिकाऊ और ट्से रे बिलिटी वाले खाद्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इन निर्यात अभियानों से स्पष्ट है कि भारत का कृषि निर्यात अब 'मात्रा आधारित मॉडल' से 'मूल्य आधारित मॉडल' की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

 

पहली बार लद्दाख की जैविक खुबानी पहुंची यूएई

 

एपीडा ने 15 जुलाई 2026 को लद्दाख से पांच मीट्रिक टन जैविक खुबानी की पहली खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भेजी। लुलु ग्रुप के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत भेजी गई इस खेप ने लद्दाख के खुबानी उत्पादकों को सीधे यूएई के उपभोक्ताओं से जोड़ दिया और भारत के प्रीमियम जैविक बागवानी उत्पादों के निर्यात में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की।

 

लद्दाख के ऊंचाई वाले बाग, प्रदूषण मुक्त वातावरण और प्राकृतिक परिस्थितियां यहां की खुबानी को बेहतरीन स्वाद, उच्च पोषण और उत्कृष्ट गुणवत्ता प्रदान करती हैं। इस निर्यात से किसानों को प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिली, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलने के साथ-साथ संगठित खरीद और कुशल लॉजिस्टिक्स के कारण कटाई के बाद होने वाले नुकसान में भी कमी आई। यह पहल गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देने और क्षेत्र में निर्यातोन्मुख मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने में भी सहायक होगी।

 

एपीडा लद्दाख प्रशासन, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), सहकारी समितियों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ मिलकर निर्यात अवसंरचना मजबूत करने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और भारत के प्रीमियम जैविक उत्पादों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का कार्य जारी रखे हुए है।

 

 

जम्मू-कश्मीर: प्रीमियम चरेी और प्लम को मिला वैश्विक बाजार

 

जम्मू-कश्मीर के शोपियां और पुलवामा जिलों से प्रीमियम अरेको चेरी (हाई-डेंसिटी यूरोपीय स्वीट चेरी) और सेंटरोज प्लम की पहली निर्यात खेप संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के अबू धाबी और दुबई भेजी गई। प्रीमियम समशीतोष्ण फलों की इस खेप की खरीद सीधे शोपियां और पुलवामा के किसानों से की गई। यद्यपि यह खेप केवल एक मीट्रिक टन की थी, लेकिन इसका आर्थिक महत्व काफी बड़ा है। निर्यात से जुड़ेकिसानों को चेरी के लिए घरेलू बाजार की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत और प्लम के लिए लगभग 120 प्रतिशत अधिक कीमत मिली।

 

यह सफल निर्यात शोपियां और पुलवामा के बागवानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के अवसर पैदा करेगा। इससे किसान निर्यातोन्मुख बाग प्रबंधन अपनाने, गुणवत्ता सुधारने और संगठित आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित होंगे। साथ ही जम्मू-कश्मीर के प्रीमियम फलों की वैश्विक पहचान और मजबूत होगी। एपीडा ने किसानों को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़कर यह साबित किया कि बेहतर गुणवत्ता वाले फलों को वैश्विक बाजार में कहीं अधिक मूल्य मिल सकता है।

 

उत्तराखंड स पहल ी बार इराक गया आईक्यूएफ फ्च फ्रें राइज

 

कृषि में मूल्य संवर्धन का एक उत्कृष्ट उदाहरण उत्तराखंड से सामने आया, जहां एपीडा ने राज्य से पहली बार इंडिविजुअल क्विक फ्रोजन (आईक्यूएफ) फ्रेंच फ्राइज का इराक निर्यात कराने में अहम भूमिका निभाई।

 

विरुन ग्लोबल ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्यात की गई यह 24 मीट्रिक टन की खेप उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर से भेजी गई। इस पहल की खास बात यह है कि कच्चे आलू निर्यात करने के बजाय स्थानीय किसानों से खरीदे गए आलू की ग्रेडिंग, धुलाई, ब्लांचिंग, कटाई और आईक्यूएफ तकनीक से प्रोसेसिंग की गई। पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों और कोल्ड चेन आवश्यकताओं के अनुरूप पूरी की गई, जिसके बाद उत्पाद को समुद्री मार्ग से इराक भेजा गया। एपीडा ने निर्यातक को सियाल, गल्फूड, इंडसफूड और वर्ल्ड फूड इंडिया जैसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए भी सहयोग प्रदान किया, जहां विदेशी खरीदारों से संपर्क के परिणामस्वरूप इराक से निर्यात ऑर्डर प्राप्त हुआ।

 

यह पहल एक महत्वपूर्ण नीतिगत चुनौती की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। बंदरगाहों से दूर स्थित राज्यों के लिए परिवहन लागत निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती है। इसलिए एपीडा उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर राज्य कृषि निर्यात नीति तैयार करने और लागू कराने पर काम कर रहा है, जिसमें परिवहन सहायता का भी प्रावधान प्रस्तावित है।

 

 

पंजाब की लीची पहली बार ओमान पहुंची

 

एपीडा ने पंजाब के होशियारपुर की उन्नति एग्री एलाइड सहकारी समिति के माध्यम से पहली बार ताजा लीची की खेप ओमान भिजवाई। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह निर्यात किसी निजी निर्यातक के बजाय एक सहकारी संस्था ने किया, जिससे किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत अधिक दाम मिला।

 

होशियारपुर का शिवालिक क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाली लीची के लिए जाना जाता है, लेकिन कम शेल्फ लाइफ और नाजुक प्रकृति के कारण यह फल स्थानीय बाजारों तक ही सीमित रह जाता था। एपीडा ने सहकारी संस्था को विदेशी खरीदार से जोड़ने और पूरी निर्यात प्रक्रिया में सहयोग देकर इस चुनौती का समाधान किया।

 

परिवहन के दौरान फल की ताजगी बनाए रखने के लिए मै. सुपर प्लम द्वारा मॉडिफाइड एटमॉस्फियर पैकेजिंग (एमएपी) तकनीक का उपयोग किया गया। इस आधुनिक पैकेजिंग तकनीक से लीची की शेल्फ लाइफ बढ़ाने में मदद मिली और यह सुनिश्चित किया कि फल सर्वोत्तम गुणवत्ता के साथ अपने गंतव्य तक पहुंचे।

 

यह निर्यात भारत-ओमान व्यापक आर्क थि साझेदारी समझौते (CEPA) के तहत उपलब्ध वरीयता प्राप्त बाजार पहुंच का लाभ उठाने की दिशा में भी एक महत्वपर्ण कदम है। इस समझौते के तहत मिली व्यापारिक रियायतों ने इस निर्यात को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाया। ओडिशा स यूरोप पहुंचा मूल्य संवर्धित एग पाउडर भारत का कृषि निर्यात अब केवल ताजे फलों तक सीमित नहीं है। इस दिशा में एक महत्वपर्ण ू उपलब्धि तब हासिल हुई जब ओडिशा से पहली बार सूखे संपर्ण अंडा पाउडर की व्यावसायिक खेप ऑस्ट्रिया भेजी गई।

 

बलांगीर स्थित ओवीओ फार्म प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भेजी गई 22.6 मीट्रिक टन की यह खेप भारत की मूल्य संवर्धित पोल्ट्री उत्पाद बनाने की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है। सूखा अंडा पाउडर लंबी शेल्फ लाइफ और आसान परिवहन के कारण बेकरी, कन्फेक्शनरी, प्रसंस्कृत खाद्य और दवा उद्योग में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुरूप तैयार करने के लिए अत्याधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र और कड़े खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होता है।

 

निर्यातक ने 2025 में आधुनिक प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया और निर्यात निरीक्षण परिषद (ईआईसी) तथा यूरोपीय संघ के स्वच्छता मानकों के अनुरूप गुणवत्ता प्रणाली अपनाई। एपीडा ने अपनी वित्तीय सहायता योजना के तहत प्रसंस्करण अवसंरचना, खाद्य सुरक्षा प्रणाली और प्रयोगशाला सुविधाओं को मजबूत करने में सहयोग दिया।

 

यह सफलता भारत के प्रसंस्कृत पोल्ट्री उद्योग के लिए नए अवसर खोलने के साथ ओडिशा के कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र को भी मजबूती प्रदान करेगी।

 

रीवा का जीआई टैग प्राप्त सुंदर्जा आम पहुंचा यूएई

 

मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त रीवा सुंदर्जा आम ने पहली बार व्यावसायिक रूप से यूएई के बाजार में प्रवेश किया।

 

एक मीट्रिक टन की इस खेप का निर्यात सॉल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया। एपीडा ने मध्य प्रदेश उद्यानिकी विभाग, निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ मिलकर इस निर्यात को संभव बनाया।

 

असाधारण मिठास, रेशारहित गूदे और विशिष्ट सुगंध के लिए प्रसिद्ध सुंदर्जा आम की क्षेत्रीय पहचान पहले से थी, लेकिन यह पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचा। आमों की खरीद सिओंधा किसान उत्पादक कंपनी से की गई और एपीडा समर्थित पैक हाउस में ग्रेडिंग व पैकिंग के बाद वाराणसी से हवाई मार्ग से यूएई भेजा गया। किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में लगभग 150 प्रतिशत अधिक कीमत मिली।

 

यह सफलता यह भी दर्शाती है कि भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण केवल पहचान का प्रतीक नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम मूल्य प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम भी है।

 

 

असम का शहद पहुंचा अमरेिका

 

एपीडा ने असम के बक्सा जिले से पहली बार किसान-नेतृत्व वाले ओडीओपी शहद का अमेरिका निर्यात कराया।

 

करीब 20 मीट्रिक टन शहद की यह खेप सॉल्ट रेंज फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा भेजी गई। यह आकांक्षी जिलों के उत्पादों की निर्यात क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है। कीटनाशक मुक्त और जैव विविधता से भरपूर वातावरण में उत्पादित बक्सा का शहद अपनी प्राकृतिक शुद्धता, पुष्प विविधता और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है। एपीडा ने प्रसंस्करण इकाई को परीक्षण और प्रयोगशाला सुविधाएं उपलब्ध कराकर अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया।

 

इस निर्यात से मधुमक्खी पालकों को स्थानीय बाजार की तुलना में लगभग 43 प्रतिशत अधिक मूल्य मिला, जिससे ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिली और टिकाऊ मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा मिला। यह पहल आकांक्षी जिलों के किसानों को उनके विशिष्ट उत्पादों के माध्यम से वैश्विक बाजार से जोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

 

कर्नाटक से न्यूज़ीलैंड पहुँचा बाजरा-आधारित फंक्शनल फूड

 

अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष अभियान के बाद दुनिया भर में मोटे अनाजों के प्रति जागरूकता तेजी से बढ़ी है। इसी क्रम में एपीडा ने पहली बार कर्नाटक से समुद्री मार्ग के जरिए वनस्पति अर्क यक्तु रेडी-टू-कुक बाजरा आधारित फंक्शनल फूड न्यूजीलैंड भेजे।

 

ये उत्पाद पारंपरिक बाजरे को सहजन, हल्दी, अदरक और अश्वगंधा जैसे वनस्पति तत्वों के साथ मिलाकर तैयार किए गए हैं, ताकि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं को सुविधाजनक और पौष्टिक विकल्प उपलब्ध कराया जा सके। बेंगलुरु स्थित इंफिनी एग्रोटेक एलएलपी द्वारा भेजी गई एक मीट्रिक टन की यह खेप दर्शाती है कि नवाचार और खाद्य प्रसंस्करण के जरिए कच् अनाज की तुलना में कहीं अ चे धिक मूल्य प्राप्त किया जा सकता है।

 

निर्यातक को एपीडा समर्थित वर्ल्ड फूड इंडिया, इंडसफूड और गल्फूड जैसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भागीदारी से विदेशी खरीदार मिले और इसी का परिणाम न्यूजीलैंड का निर्यात आदेश रहा।

 

 हिमाचल प्रदेश के चेरी और प्लम पहली बार पहुंच ओमान

 

हिमाचल प्रदेश ने भी पहली बार ताजा चेरी और प्लम का व्यावसायिक निर्यात ओमान कर भारत की बागवानी निर्यात कहानी में नया अध्याय जोड़ा। यह खेप जडोल-टिक्कर और बागी क्षेत्र के छह प्रगतिशील बागवानों से प्राप्त फलों से तैयार की गई। किसानों को चेरी के लिए 46 प्रतिशत और प्लम के लिए 40 प्रतिशत अधिक कीमत मिली।

 

इस पहल की शुरुआत अवसंरचना निर्माण से नहीं बल्कि किसानों के क्षमता विकास से हुई। एपीडा ने निर्यात मानकों, कटाई के बाद प्रबंधन और गुणवत्ता नियत्रं ण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। हिमाचल प्रदेश हॉर्टिकल्चरल प्रोड्स मा यू र्टिं के ग एंड प्रोसेसिंग कॉरपोरेशन (एचपीएमसी) ने ग्रेडिंग, पकिैग और गुणवत्ता परीक्षण का खर्च उठाकर किसानों का आर्क थि बोझ कम किया।

 

झारखंड की आदिवासी महिला किसानों की सफलता

 

सामाजिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण पहल झारखंड के आकांक्षी जिला गुमला और आकांक्षी ब्लॉक देवघर से अम्रपाली आम का दुबई निर्यात रही। दो मीट्रिक टन की यह खेप तीन महिला- नेतृत्व वाली किसान उत्पादक कंपनियों से प्राप्त की गई, जिनसे 50 हजार से अधिक किसान जुड़े हैं।

 

इन महिला एफपीसी के सदस्यों को स्थानीय बाजार की तुलना में लगभग 180 प्रतिशत अधिक कीमत मिली। इससे स्पष्ट होता है कि निर्यात आधारित कृषि महिलाओं और आदिवासी समुदायों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। निर्यात से पहले एपीडा ने अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, कटाई के बाद प्रबंधन और निर्यात प्रक्रियाओं पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए, जिससे किसान वश्विै क बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन कर सके।

 

निर्यातोन्मुख कृषि अर्थव्यवस्था की ओर

 

इन पहली बार हुए निर्यात अभियानों की शखला बताती है ्रृं कि एपीडा भारतीय किसानों को वश्विै क कृषि मूल्य शखलाओं से जोड़ने में ्रृं लगातार व्यापक भूमिका निभा रहा है। पारंपरिक निर्यातों के साथ-साथ अब संस्था प्रीमियम ताजे फल, जीआई टैग वाले उत्पाद, जैविक कृषि उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, ओडीओपी उत्पाद और नवाचारी मूल्य संवर्धित खाद्य पदार्थों को भी बढ़ावा दे रही है। ये पहलें भारत के कृषि निर्यात में विविधीकरण की दिशा को भी रेखांकित करती हैं। जहां खाड़ी देश भारतीय बागवानी उत्पादों के प्रमुख बाजार बने हुए हैं, वहीं यूरोप, अमेरिका, न्यूजीलैंड और इराक जैसे नए बाजार विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए तेजी से खुल रहे हैं।

 

दुनिया भर में प्रीमियम, सुरक्षित, ट्सरे बिलिटी वाले और टिकाऊ खाद्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में एपीडा की ये पहलें भारत के कृषि निर्यात परिदृश्य को नई दिशा दे सकती हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती इन सफल मॉडलों का अधिक राज्यों और अधिक उत्पादों तक विस्तार करना है, ताकि छोटे और सीमांत किसान भी वश्विै क खाद्य मूल्य शखला का ्रृं मजबूत हिस्सा बन सकें।


अजीत सिंह

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