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मिशन की भरमार क्या होगा कृषि का बेड़ा पार ?

वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट में कृषि क्षेत्र में दलहन और तिलहन से लेकर कपास तक कई मिशन की घोषणा की गई है, लेकिन फसल बीमा योजना का प्रावधान 23 फीसदी घटा दिया गया है और एमएसपी बढ़ने के बावजूद खाद्य सब्सिडी में कटौती की गई है

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अजीत सिंह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट (2125-25) उनकी प्राथमिकता वाले वर्ग 'किसान, महिला, युवा और गरीब' में शुमार किसान के लिए सरकार द्वारा लंबी अवधि की नीतिगत दिशा तय करने का यह मौका था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमग ने शुरुआत में ही कहा कि विकसित भारत के लिए अर्थव्यावस्था के चार इंजनों में पहला कृषि है। लेकिन बजट में कृषि के लिए दीर्घकालिक नीतिगत पहल की बजाय उनके फैसले मिशन में ही सिमट गये। उन्होंने कृषि क्षेत्र के लिए कई मिशन घोषित किए। 100 करोड़ रुपये से लेकर 3000 करोड़ रुपये के प्रावधानों के साथ इन मिशनों की एक फेहरिस्त बजट में पेश कर दी। अब यह मिशन और बजट के बाकी प्रावधानों के किसानों और कुषि के लिए क्या मायने हैं और उनके जीवन में इससे क्या वाकई कोई बड़ा बदलाव आयेगा यह बड़ा सवाल है जिसका उत्तर आने वाले दिनों में ही मिल पाएगा। 

 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गरीब, युवा अन्नदाता और नारी यानी ज्ञान पर खास जोर दिया और कृषि विकास, उत्पादकता बढ़ाने तथा ग्रामीण समृद्धि समेत 10 प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी। बजट के प्रमुख मर्दा में कृषि और संबद्ध कार्यकलाप का बजट 2024-25 के संशोधित अनुमान 140850 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 175437 करोड़ रुपये किया गया है। हालांकि, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का बजट 141351 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 3586 करोड़ रुपये मटाकर 137756 करोड़ रुपये कर दिया। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग का बजट चालू वित्त वर्ष के 131155 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से घटाकर 127200 करोड़ रुपये किया गया है। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (रोजार) का बजट 10150 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से केवल 310 करोड़ रुपये बढ़ाकर 10466 करोड़ रुपये किया गया है। यानी वित्त मंत्री ने कृषि को अर्थव्यवस्था का इंजन तो बताया लेकिन इस इंजन को ईथन देने में कंजूसी बरती है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना समेत कई योजनाओं और उर्वरक सब्सिडी के बजट में कटौती की गई है। हालांकि, वित्त मंत्री ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देते हुए कई नई योजनाएं और मिशन लॉन्च करने का ऐलान किया। 

 

बजट में सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) से मिलने वाले लोन की लिमिट को 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया है। इसका लाभ केसीसी के दायरे में आने वाले लगभग 7.7 करोड़ किसानों, मछुआरों और डेयरी किसानों मिलेगा। केसीसी के जरिए सालाना 7 फीसदी की रियायती ब्याज दर पर कर्ज मिलता है। समय पर कर्ज चुकाने वालों को 3 फीसदी ब्याज छूट भी मिलती है। इस प्रकार किसानों को 4 फीसदी ब्याज पर कर्ज मिलना संभव हो जाता है। लेकिन केसीसी की लिमिट बढ़ाने के बावजूद ब्याज छूट का प्रावधान पिछले साल के स्तर पर ही है। 

 

एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स प्रोग्राम की तर्ज पर 'प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना' शुरू करने का ऐलान किया गया है। राज्यों की भागीदारी से इस योजना के तहत कम उपज और उत्पादकता वाले 100 जिलों को शामिल किया जाएगा। इन जिलों में कृषि पैदावार बढ़ाने, फसल विविधता और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने, पंचायत व ब्लॉक स्तर पर भंडारण, सिंचाई सुविधाओं में सुधार और ऋण उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम से देश के 1.7 करोड़ किसानों को मदद मिलने की संभावना है। 

 

ग्रामीण समृद्धि के लिए राज्यों की भागीदारी से एक व्यापक बहु-क्षेत्रीय 'ग्रामीण समृद्धि और अनुकूलन' कार्यक्रम प्रारम्भ किया जाएगा। इससे कौशल, निवेश और तकनीक के माध्यम से रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों से मजबूरी में होने वाली पलायन को रोका जा सके। कार्यक्रम के पहले चरण में 100 विकासशील कृषि जिलों को शामिल किया जाएगा और ग्रामीण महिलाओं युवा, छोटे किसानों और भूमिहीन परिवारों पर ध्यान दिया जाएगा। 

 

एक साथ कई मिशन 

 

इस बार भी वित्त मंत्री ने खाद्य तेलों और दलहन में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है। हालांकि, अभी तक इस दिशा में अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं। अब केंद्र सरकार अरहर, उड़द और मसूर पर विशेष ध्यान देते हुए 6-वर्षीय " दलहन आत्मनिर्भरता मिशन" शुरू करने जा रही है। केंद्रीय एजेंसियां (नेफेड और एनसीसीएफ) 

 

किसानों से इन दालों की अधिकतम खरीद करेंगी। दलहन मिशन के लिए 1000 करोड़ रुपये का बजट है। 

 

फल-सब्जियों के लिए व्यापक कार्यक्रम की घोषणा भी बजट में की गई है। सब्जियों व फलों के उत्पादन, आपूर्ति, प्रसंस्करण और किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने के लिए राज्यों की भागीदारी से यह कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसमें किसान उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। फल-सब्जी मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का बजट है। 

 

देश में कपास की खेती की चुनौतियों के मद्देनजर कपास उत्पादकता मिशन की घोषणा की गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि इस पंचवर्षीय मिशन से कपास की पैदावार बढ़ाने और टिकाऊ खेती को अपनाने में मदद की जाएगी। कपास की खेती के लिए किसानों को तकनीकी सहायता मुहैया कराई जाएगी ताकि उनकी आमदनी में इजाफा हो और टेक्सटाइल सेक्टर के लिए बढ़िया कपास की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। कपास मिशन के लिए बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 

 

किसानों को गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए बजट में राष्ट्रीय उच्च पैदावार बीज मिशन शुरू करने की घोषणा की गई। इससे रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करने, अधिक उपज व जलवायु अनुकूल बीज विकसित करने तथा जुलाई 2024 से जारी की गई 100 से अधिक बीज किस्मों को बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। बीज मिशन को 100 करोड़ रुपये का बजट मिला है। 

 

बजट की अहम घोषणाओं में बिहार में मखाना बोर्ड की स्थापना भी शामिल है। इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट है। मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, वैल्यू एडिशन और विपणन में सुधार के लिए बिहार में मखाना बोर्ड स्थापित किया जाएगा जो किसानों को मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के साथ-साथ सरकारी योजनाओं का लाभ दिलवाने का प्रयास करेगा। मखाना खेती करने वाले किसानों को एफपीओ के तौर पर संगठित किया जाएगा। 

 

यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाने के लिए सरकार असम के नामरूप में 127 लाख मीट्रिक टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता वाला यूरिया प्लांट स्थापित करेगी। पूर्वी भारत में निष्क्रिय पड़े तीन यूरिया संयंत्रों के दोबारा शुरू होने से यूरिया आपूर्ति बढ़ाने में सहायता मिलेगी। मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं को देखते हुए सरकार अंडमान और निकोबार तथा लक्षद्वीप में गहरे समुद्री मत्स्य पालन को बढ़ावा देगी। भारतीय डाक को सार्वजनिक लॉजिस्टिक संगठन के रूप में तब्दील करने की तैयारी है। 

 

कृषि से जुड़ी प्रमुख केंद्रीय योजनाओं में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का बजट 6000 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से बढ़ाकर 8500 करोड़ रुपये किया गया है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए शुरू हुए राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन को पिछले बजट में 365 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ था. जिसे संशोधित अनुमान में घटाकर 100 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस बार 616 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। मिशन के तहत एक करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य है। 

 

पीएम किसान सम्मान योजना के लिए 63500 करोड़ रुपये के प्रावधान को बरकरार रखा गया है। किसानों को पेंशन देने वाली पीएम मानधन योजना के लिए केवल 120 करोड़ रुपये का प्रावधान है जो पिछले बजट में 100 करोड़ रुपये था। दस हजार एफपीओ बनाने की योजना के लिए 584.60 करोड़ रुपये का प्रावधान है जो पिछले साल के लगभग बराबर है। मधुमक्खी पालन के लिए 75 करोड़ और एग्री स्टार्टअप के लिए 71.50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 

 

 

फसल बीमा योजना का प्रावधान कम किया 

 

किसानों को प्राकृतिक जोखिम से बचाने के लिए शुरू की गई फसल बीमा योजना का बजट 15864 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से घटाकर 12242 करोड़ रुपये किया गया है। फसल बीमा योजना के बजट में यह बड़ी कटौती है। किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए शुरू की गई पीएम-आशा योजना के लिए 6945.36 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया जो पिछले बजट में 6437 करोड़ रुपये था। हालांकि, देश भर में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बिकने वाली विभिन्न फसलों को देखते हुए पीएम-आशा के बजट में करीब 500 करोड़ रुपये की यह बढ़ोतरी भी नाकाफी प्रतीत होती है|

 

दालों के वितरण के लिए इस बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। जबकि पीएम-किसान योजना को चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान के बराबर 63500 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। कृषि में बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ावा देने वाले एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) का बजट 750 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से बढ़ाकर 900 करोड़ रुपये किया गया है। 

 

नमो ड्रोन दीदी योजना के लिए पिछले साल बजट में 500 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, जिसे संशोधित अनुमान में घटाकर 250 करोड़ रुपये किया गया। इस बार नमो ड्रोन दीदी योजना के लिए 678 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। 

 

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया लेकिन कृषि विज्ञान केंद्रों का बजट 235 करोड़ रुपये से घटाकर 204 करोड़ रुपये कर दिया है। जबकि आईसीएआर का बजट 6370 करोड़ रुपये से मामूली बढ़ोतरी कर 6425 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। 

 

डेयरी और फूड प्रोसेसिंग पर अधिक जोर 

 

पशुपालन और डेयरी विभाग का बजट चालू वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 4521 करोड़ रुपये तय किया गया था, जिसे संशोधित अनुमान में घटाकर 3830 करोड़ रुपये कर दिया गया। वर्ष 2025-26 के बजट में इस विभाग के लिए 4840 करोड़ रुपये का प्रावधान है जो गत वर्ष के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि है। मत्स्य विभाग का बजट 1666 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2703 करोड़ रुपये किया गया है। इसमें सबसे अधिक बढ़ोतरी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए आवंटन में हर्ज है जिसे 1500 करोड रुपये से बढ़ाकर 2465 करोड़ रुपये किया गया है। 

 

खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय का बजट 2796 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से बढ़ाकर 4364 करोड़ रुपये किया गया है। फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव स्कीम के लिए आवंटन 700 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1200 करोड़ रुपये किया गया है। इसी मंत्रालय की प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना का बजट 630 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 903 करोड़ रुपये किया गया है। लघु खाद्य उद्यमों को बढ़ावा देने वाली योजना पीएम-एफएमई का बजट 1200 करोड़ रुपये से बढ़कर 2000 रुपये हो गया है। 

 

उर्वरक सब्सिडी नीति यथावत 

 

उर्वरकों पर सब्सिडी की नीति में कोई खास बदलाव नहीं किया गया है। यूरिया सब्सिडी को पिछले साल के लगभग बराबर 118899 करोड़ रुपये और एनपीके उर्वरकों पर मिलने वाली न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (एनबीएस) को 52310 करोड़ रुपये से घटाकर 49000 करोड़ रुपये किया गया है। देश में डीएपी उर्वरकों की मांग और आपूर्ति स्थिति को देखते हुए न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी बढ़ाने की आवश्यकता थी, लेकिन चालू वर्ष के संशोधित अनुमान के मुकाबले 3310 करोड़ रुपये की कटौती की गई है। 

 

फर्टिलाइजर सब्सिडी 171298 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान के मुकाबले 167887 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। जबकि आर्गेनिक उर्वरकों को बढ़ावा देने की योजना के लिए 45 करोड़ रुपये के बजट को बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये किया गया है। 

 

खाद्य सब्सिडी का बजट केंद्र सरकार ने पिछली बार के बजट अनुमान 205250 करोड़ रुपये से थोड़ा घटाते हुए 203420 करोड़ रुपये रखा है जबकि केंद्र सरकार ने गेहूं और धान पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ा दिया है। इससे खाद्य सब्सिडी का खर्च बढ़ने का अनुमान है। गौरतलब है कि वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार ने खाद्य सब्सिडी के मद में 211814 करोड़ रुपये खर्च किए थे। 

 

ग्रामीण समृद्धि पर खास जोर देने वाले इस बजट में ग्रामीण विकास मंत्रालय के लिए 190405 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान है जो गत वर्ष के मुकाबले करीब 10 हजार करोड़ रुपये अधिक है। ग्रामीण विकास विभाग का बजट 177566 करोड़ रुपये से बढ़कर 187754 करोड़ रुपये हो गया है। हालांकि, ग्रामीण विकास से जुड़ी प्रमुख योजना मनरेगा के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई और इसे पिछले साल के बराबर 86000 करोड़ रुपये रखा गया है।

 

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का बजट 12100 रुपये से बढ़ाकर 16600 करोड़ रुपये किया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का बजट 1507 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 19005 करोड़ रुपये और पीएम आवास योजना ग्रामीण का बजट 32426 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से बढ़ाकर 54831 करोड़ रुपये किया गया है।


अजीत सिंह

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