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मिशन कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बेहतरी का

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हरवीर सिंह

रूरल वर्ल्ड अपने इस अंक के साथ दूसरे साल में प्रवेश कर रही है। पांच साल पहले समृद्ध ग्रामीण भारत की सोच के साथ शुरू हुई रूरल वॉयस मीडिया प्लेटफॉम की यात्रा के चौथे साल में रूरल वर्ल्ड पत्रिका के प्रकाशन की शुरुआत हुई थी। रूरल वर्ल्ड के अभी तक के जो संस्करण प्रकाशित हुए हैं उनके जरिये किसानों को सूचनाओं, टेक्नोलॉजी और बाजार के मामले में मजबूत करने का हमारा प्रयास रहा है। विषय चयन और हर संस्करण में प्रकाशित आलेख रिपोर्ट्स के मूल में एक ही मकसद रहा है कि किसानों और ग्रामीण भारत के नागरिकों लिए क्या अहम है। इसमें हमने एक तरफ राज्यों, देश और वैश्विक स्तर के नीतिगत फैसलों को लिया तो वहीं स्थानीय, घरेलू और वैश्विक बाजार के घटनाक्रम और कृषि सहयोगी क्षेत्र के उत्पादों की कीमतें, आयात निर्यात से जुड़ी तमाम जानकारियां भी शामिल रहीं। कृषि शोध और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नया क्या हो रहा है और क्या होना चाहिए, इसे भी इन संस्करणों में समाहित किया गया। हमें इस बात का गर्व है कि रूरल वर्ल्ड के हर संस्करण को पाठकों की सराहना मिली।

 

आपके हाथ में जो अंक है वह रूरल वर्ल्ड का वार्षिक अंक है। संयोग है कि यह अंक वित्त वर्ष 2025-26 के आम बजट के कुछ दिन बाद रहा है। इसलिए इस अंक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट में कृषि और सहयोगी क्षेत्र ग्रामीण भारत के लिए किस तरह के प्रावधान किये गये, किन नई योजनाओं की घोषणा की गई, उनकी जानकारी के साथ ही उनका विश्लेषण गहराई से किया गया है। यह बजट कृषि में कई मिशन शुरू करने वाला बजट है। भारत सरकार के पूर्व खाद्य एवं कृषि सचिव, टी नंदकुमार ने बजट की धन-धान्य कृषि योजना और उसी तर्ज पर ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत 100 जिलों के लिए शुरू गई योजना का आकलन करने के साथ ही इस तरह की योजनाओं से कैसे नतीजे मिल सकते हैं, उस पर बात की है।

 

बजट के साथ ही एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम अमेरिका में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की वापसी है। कार्यभार संभालने के तुरंत बाद मेकिंग अमेरिका ग्रेट अगेन (मागा) के अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने टैरिफ लगाने के साथ रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की चेतावनी दी। यह भारत के कृषि क्षेत्र, बाजार और किसानों पर गहरा असर डाल सकता है। इसका विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के वैश्विक स्तर के विशेषज्ञ और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व प्रोफेसर डॉ बिस्वजीत धर ने किया है।

 

दो साल पहले देश ने लंपी स्किन बीमारी (एलएसडी) के चलते लाखों गौवंश को खोया था। इससे हमारे किसानों को करीब 18 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और गायों की दूध देने की क्षमता में 25 फीसदी तक की गिरावट आई थी। इस बीमारी को रोकने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिकों ने एक स्वदेशी वैक्सीन लंपी प्रोवैकइंड विकसित की है। करीब पांच साल की मेहनत से इस वैक्सीन को विकसित करने और उसके व्यवसायीकरण के लिए निजी क्षेत्र की एक कंपनी को मंजूरी मिलने तक की गाथा क्या है, उसे इस वैक्सीन के शोधकर्ता वैज्ञानिकों डॉ. बी एन त्रिपाठी और डॉ नवीन कुमार ने रूरल वर्ल्ड के लिए विशेष रूप से लिखे गये एक लेख के जरिये बताया है।

 

डेयरी सेक्टर में भारत के किसान किस तरह वैश्विक स्तर की उत्पादकता के कीर्तिमान बना रहे हैं। अमूल के पूर्व मैनेजिंग डायेरक्टर और इंडियन डेयरी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. आर एस सोढ़ी ने पंजाब के जगरांव में आयोजित एक डेयरी फेयर में किसानों के ग्लोबल लीडर बनने की उपलब्धियों पर लिखा है। फसलों के अलावा डेयरी और मत्स्यपालन कृषि के दो सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्र हैं और इनमें किसानों की आय भी बढ़ रही है। इस अंक में एक विस्तृत आलेख में एक्वाकल्चर क्षेत्र में रहे परिवर्तन और उसकी भावी तस्वीर रखी गई है। वहीं कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ग्लेन डेनिंग के साक्षात्कार के जरिए कृषि, जलवायु परिवर्तन और टिकाऊ खाद्य सुरक्षा के मुद्दे को विस्तार से सामने लाया गया है।

 

पहले साल की सफल यात्रा ने रूरल वर्ल्ड की टीम के हौसले को मजबूत किया है। देश में कृषि क्षेत्र और किसानों ग्रामीण नागरिकों को सूचना समाचारों के जरिए समृद्ध करने की हमारी कोशिश और अधिक मजबूती से जारी रहेगी।


हरवीर सिंह
प्रधान संपादक

रूरल वर्ल्ड पत्रिका कृषि नीति, किसानों के मुद्दों, नई तकनीक, एग्री-बिजनेस और नई योजनाओं से जुड़ी तथ्यपरक जानकारी देती है।

हर अंक में किसी अहम मुद्दे पर विशेषज्ञों के लेख, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट और समाचार होते हैं।

RNI No: DELBIL/2024/86754 Email: [email protected]


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