कैमरून के याउंड में 26-29 मार्च को आयोजित विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) का 14वां मंत्रिस्तरीय सम्मेलन बिना किसी सहमति के समाप्त हो गया। इसमें बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में गहर मतभेद उजागर हुए। कृषि, ई-कॉमर्स और संस्थागत सुधार जैसे अहम मुद्दों पर फैसले जिनेवा के लिए टाल दिए गए। सेफगार्ड प्रावधान भी कायम नहीं रह सके। नतीजों के लिहाज से यह हाल के वर्षों में सबसे खराब मंत्रिस्तरीय सम्मेलनों में से एक है और डब्ल्यूटीओ की निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल खड करता है। महानिदेशक नगोजी ओकोंजो-इवेला ने माना कि सदस्य देश समझौते के करीब थे, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन सकी। डब्ल्यूटीओ सुधार, ई-कॉमर्स, ट्रिप्स और अल्पविकसित देशों के पैकेज से जुड मसौदे अब जिनेवा में होने वाली जनरल काउंसिल बैठक में आगे की बातचीत का आधार बनेंगे।
ई-कॉमर्स और ट्रिप्स सुरक्षा प्रावधान खत्म
गतिरोध का मुख्य कारण 1998 से लागू ई-कॉमर्स मोराटोरियम को आगे बढ़ाने में विफलता रही। अमेरिका, ईयू और जापान जैसे विकसित देशों ने इसे लंबे समय या स्थायी रूप से बढ़ाने क ी मांग की। लेकिन तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था को देखते हुए विकासशील देशों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि इससे राजस्व का नुकसान स्थायी हो जाएगा। ब्राजील ने चार साल के विस्तार जैसे प्रस्तावों को रोकने में अहम भूमिका निभाई। रोचक बात यह रही कि ब्राजील ने कृषि वार्ता में प्रगति न होने का हवाला देते हुए ई-कॉमर्स मोराटोरियम के प्रस्ताव को रोका। नतीजतन, 26 साल में पहली बार यह मोर ा टोरियम समाप्त हो गया, जिससे अब विभिन्न देश डिजिटल ट्रांसमिशन पर श ु ल्क लगा सकते हैं।
ट्रिप्स समझौते के तहत गैर-उल्घन (नॉन- वायलेशन) शिकायतों पर लगी रोक भी समाप्त हो गई। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव के अनुसार, इससे विकासशील देशों पर खतरा बढ़ गया है, क्योंकि अब डब्ल्यूटीओ के अनुरूप नीतियों को भी चुनौती दी जा सकती है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए उपयोग होने वाले अनिवार्य लाइसेंस जैसे कदमों को विकसित देश विवाद में ला सकते हैं। इस मौके पर 66 सदस्य देश डब्ल्यूटीओ के बाहर एक अलग ई-कॉमर्स समझौते पर आगे बढ़े।
सुधार वार्ता ठप
डब्ल्यूटीओ में सुधार के रोडमैप पर सहमति बनाने के प्रयास भी विफल रहे। वर्ष 2028 तक सुधार की दिशा में काम करने के प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी। विकसित देश तेज निर्णय प्रक्रिया और सख्त नियम चाहते हैं, जबकि विकासशील देश नीतिगत लचीलापन और सर्वसम्मति के सिद्धांत को बनाए रखना चाहते हैं। इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन फॉर डेवलपमेंट एग्रीमेंट (IFDA) भारत के विरोध के कारण अटका। भारत का तर्क है कि ऐसे बहुपक्षीय ढांचे से बाहर बने समझौते डब्ल्यूटीओ की मूल बहुपक्षीय प्रकृति को कमजोर करेंगे और छोट े समूहों को नियम बनाने का मौका देंगे। भारत के इस कदम से सर्वसम्मति आधारित निर्णय प्रणाली की रक्षा हुई है।
सम्मेलन की खास बात यह है कि न केवल नए समझौते नहीं हो सके , बल्कि पुराने ढांचे भी टूट गए। इसकी तुलना 11वें (ब्यूनस आयर्स, 2017) और पांचवें सम्मेलन (कानकून, 2003) से की जा सकती है। ब्यूनस आयर्स में घोषणापत्र नहीं बन पाया था और कानकून में नए मुद्दों पर मतभेद के कारण वार्ता टूट गई थी।
फिशरीज पर वार्ता में सीमित प्रगति
गतिरोध के बीच फिशरीज सब्सिडी पर बातचीत में कुछ प्रगति देखने को मिली। भारत ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के नेतृत्व में इसमें सक्रिय भूमिका निभाई। भारत ने जोर दिया कि आगे की वार्ता में विशे ष और अलग व्यवहार (S&DT), साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियां (CBDR-RC) और 'पोल्य ु टर पे' सिद्धांत जैसे न्यायसंगत सिद्धांतों को शामिल किया जाए। भारत के प्रमुख प्रस्तावों में विकासशील देशों के लिए 25 वर्ष की संक्रमण अवधि, गहर े समुद्र में औद्योगिक स्तर पर मछली पकड़ने वाले बेड़ों पर सख्त नियम, छोट े और पारंपरिक मछुआरों के लिए स्थायी छूट , और प्रति व्यक्ति सब्सिडी के आधार पर नियम शामिल हैं।
गोयल ने कहा कि भारत में मत्स्य क्त्र 90 स े लाख से अधिक परिवारों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा है, जिनमें अधिकतर छोटे और पारंपरिक मछुआर हैं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत बड ़े पैमाने पर औद्योगिक मछली पकड़ने वाला देश नहीं है और यहां प्रति परिवार सब्सिडी लगभग 15 डॉलर सालाना है, जो दूसरे देशों में बहुत अधिक है। डब्ल्यूटीओ के अनुसार , फिशरीज सब्सिडी पर 15वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन तक सिफारिशें पेश की जाएंगी।
एमसी14 ने डब्ल्यूटीओ को एक नाज़ुक मोड़ पर ला खड़ा किया है। जब पुराने सुरक्षा प्रावधान खत्म हो रहे हों, स ही धार प्रक्रिया ठप हो और वार्ताएं संगठन के बाहर होने लगें, तब इसकी प्रासंगिकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिशरीज वार्ता उम्मीद जरूर देती है, लेकिन असली चुनौती विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेदों को दूर कर सर्वसम्मति आधारित प्रणाली को फिर से मजबूत करना है।