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‘अन्नदाता’ के लिए नया कुछ नहीं

कृषि मंत्रालय का बजट सिर्फ 740 करोड़ रुपये बढ़ा। तिलहन उत्पादन बढ़ाने की नई रणनीति बनेगी, डेयरी किसानों के लिए व्यापक कार्यक्रम तैयार होगा, नैनो यूरिया के बाद अब नैनो डीएपी को बढ़ावा

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Ajeet Singh

आम चुनाव से पहले वित्त वर्ष 2024-25 के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किसानों को अन्नदाता संबोधित करते हुए कहा कि उनका कल्याण केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसानों के सशक्त तथा समृद्ध होने से देश आगे बढ़ेगा। लेकिन क्या बजट प्रावधान भी सरकार की इस भावना को दर्शाते हैं? कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय का बजट सिर्फ 740 करोड़ रुपये बढ़ा है। कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न विभागों को देखें तो कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, उर्वरक विभाग, ग्रामीण विकास मंत्रालय, पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्रालय और खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग का कुल आवंटन वित्त वर्ष 2023-24 के संशोधित अनुमान की तुलना में लगभग तीन प्रतिशत कम हो गया है।

बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए सरसों, मूंगफली, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी तिलहन फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की नई रणनीति तैयार की जाएगी। इसमें तिलहन की अधिक उत्पादकता वाली किस्मों पर शोध, आधुनिक कृषि पद्धतियों को प्रसार, मार्केट लिंकेज और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जाएगा। फसल कटाई के बाद की गतिविधियों जैसे स्टोरेज, सप्लाई चेन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के लिए सरकारी और निजी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। राष्ट्रीय गोकुल मिशन, नेशनल लाइवस्टॉक (मवेशी) मिशन जैसी योजनाओं की सफलता से सीख लेते हुए डेयरी किसानों के लिए एक व्यापक कार्यक्रम तैयार किया जाएगा। नैनो यूरिया की सफलता के बाद सरकार अब नैनो डीएपी को अपनाने पर भी जोर दे रही है। सभी कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों पर नैनो डीएपी का इस्तेमाल किया जाएगा।

कुल 47.65 लाख करोड़ रुपये के अंतरिम बजट में 2024-25 के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय को 117528.79 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष का संशोधित अनुमान 116788.96 करोड़ रुपये है। तर्क यह दिया जा सकता है कि अंतरिम होने के नाते इसमें बड़ी घोषणाओं से बचा गया है। लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि पीएम किसान सम्मान निधि की घोषणा 2019-20 के अंतरिम बजट में ही की गई थी और चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले किसानों को इसकी दो किस्तों का भुगतान भी कर दिया गया था। इस योजना के लिए आवंटित 60,000 करोड़ रुपये की राशि में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस योजना के तहत किसानों को साल में 6,000 रुपये दिए जा रहे हैं, जिसमें वृद्धि का अनुमान था।

ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की आय के एक प्रमुख माध्यम, मनरेगा में मौजूदा वित्त वर्ष के 60,000 करोड़ के बजट प्रावधान को संशोधित कर 86,000 करोड़ किया गया है। नए वित्त वर्ष के लिए भी 86,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है। फसल बीमा योजना की राशि में कटौती की गई है। इसे 15,000 करोड़ के संशोधित अनुमान से घटाकर 14,600 करोड़ किया गया है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए तमाम विशेषज्ञों के साथ सरकार भी कृषि में इनोवेशन की बात कहती है, लेकिन कृषि अनुंसधान के लिए आवंटन को मौजूदा वर्ष के 9876.60 करोड़ के संशोधित अनुमान से सिर्फ 65 करोड़ बढ़ाकर 9941.09 करोड़ रुपये किया गया है। पीएम कृषि सिंचाई योजना की राशि में जरूर उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके लिए 8,781 करोड़ के प्रावधान को बढ़ाकर 11,391 करोड़ रुपये किया गया है।

बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव से किसानों को बचाने के लिए सरकार ने प्राइस सपोर्ट स्कीम शुरू की थी। वर्ष 2022-23 में इस योजना के लिए 4007 हजार करोड़ रुपये का बजट मिला था। यह चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान में घटकर 40 करोड़ रुपये रह गया और अगले वित्त वर्ष में इसके लिए कोई प्रावधान ही नहीं किया गया है। राज्यों में दालों के वितरण के लिए सरकार ने पिछले बजट में 800 करोड़ रुपये (संशोधित 446 करोड़) का प्रावधान किया था। लेकिन इस बार इस योजना को भी बजट नहीं मिला है। पीएम अन्नदाता आय संरक्षण योजना (पीएम-आशा) के लिए 2200 करोड़ के संशोधित अनुमान को अगले वित्त वर्ष में घटाकर 1737 करोड़ कर दिया गया है।

किसान संपदा योजना के लिए इस बार 729 करोड़ का बजट रखा गया है जो पिछली बार 923 करोड़ रुपये था। देश में 10 हजार एफपीओ गठित करने की योजना के लिए पिछले बजट में 955 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जो संशोधित होकर सिर्फ 450 करोड़ रह गया। अगले वित्त वर्ष के बजट में इसे 582 करोड़ रुपये किया गया है। प्राकृतिक खेती के शोर के बावजूद इसके लिए मौजूदा वित्त वर्ष में आवंटित 459 करोड़ के बजट में से सिर्फ 100 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। अगले बजट में इसके लिए 365.64 करोड़ रुपये रखे गए हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सरकार लगभग एक करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनने में मदद कर चुकी है। इस सफलता से प्रेरणा लेते हुए लखपति दीदी का लक्ष्य दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ किया गया है। ड्रोन दीदी योजना के लिए बजट में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पीएम आवास योजना के तहत केंद्र सरकार तीन करोड़ मकान बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के करीब है। आवास की जरूरतों को देखते हुए अगले पांच वर्षों में और दो करोड़ मकान बनाए जाएंगे। सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय का बजट पिछले साल के 1.57 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2024-25 के लिए 1.77 लाख करोड़ रुपये किया है, जो लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि है। हालांकि, 1.71 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान की तुलना में यह तीन प्रतिशत ही अधिक है।

कृषि उन्नति योजना के लिए अंतरिम बजट में 7,447 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष का संशोधित अनुमान 6,378 करोड़ है जबकि बजट अनुमान 7,066 करोड़ था। इस योजना में खाद्य तेल-ऑयल पाम और तिलहन, बागवानी का एकीकृत विकास, कृषि विपणन जैसे मद आते हैं। मिट्टी और जल संरक्षण के लिए 38.72 करोड़ के संशोधित प्रावधान को नए साल में घटाकर 35.75 करोड़ किया गया है।

वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि पीएम-किसान सम्मान योजना के तहत 11.8 करोड़ किसानों को हर साल सीधे वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। चार करोड़ किसानों का फसल बीमा हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक राष्ट्रीय कृषि बाजार (eNAM) का लाभ 1361 मंडियों और 1.8 करोड़ किसानों को मिल रहा है। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से 38 लाख किसान लाभान्वित हुए और 10 लाख रोजगार पैदा हुए हैं।


Ajeet Singh

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