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पहला एफएमडी मुक्त राज्य बनने की ओर हरियाणा

डबल वैक्सीन के बूते एफएमडी मुक्त भारत अभियान में अहम भूमिका निभा रहा है हरियाणा, हर छठे महीने 55 लाख से अधिक पशुओं का टीकाकरण

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Ajeet Singh

पशुपालन न सिर्फ कृषि का पूरक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। खासतौर पर ग्रामीण परिवारों के लिए यह आय का प्रमुख साधन है। आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, देश के ग्रॉस वैल्यू एडेड (जीवीए) में लाइवस्टॉक सेक्टर का योगदान 4.66 फीसदी है और कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के जीवीए में पशुपालन की हिस्सेदारी 30.38 फीसदी तक पहुंच गई है। हरियाणा की इकनॉमी में तो पशुपालन का महत्व और भी ज्यादा है क्योंकि राज्य की कुल जीडीपी में पशुपालन का योगदान 8.57 फीसदी है और कृषि जीडीपी में पशुपालन का योगदान 44 फीसदी से भी अधिक है। लेकिन पशुपालन की चुनौतियों भी कम नहीं हैं। पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग (एफएमडी), गलघोंटू (एचएस), ब्रूसेलोसिस आदि बीमारियों से बचाना बेहद जरूरी है।

  खुरपका एवं मुंहपका रोग (एफएमडी) जुगाली करने वाले पशुओं में होने वाला अत्यधिक संक्रामक रोग है जो पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाता है। अत्यंत सूक्ष्म विषाणु से होने वाला यह रोग पशुओं में तेजी से फैलता है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, भारत में खुरपका मुंहपका रोग से सालाना करीब 24 हजार करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यह रोग भारत ही नहीं बल्कि विश्व भर में पशुपालन और खाद्य सुरक्षा के लिए चुनौती बना हुआ है।

  देश से मुंहपका-खुरपका रोग को मिटाने के लिए केंद्र सरकार 'एफएमडी मुक्त भारत' अभियान चला रही है। वर्ष 2030 तक भारत को एफएमडी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार ने 2019 में पशुओं की दो प्रमुख बीमारियों मुंहखुर और बुरोलोसिस के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनएडीसीपी) की शुरुआत की थी। कार्यक्रम के तहत एफएमडी की रोकथाम के लिए छह माह में एक बार सभी गाय-भैंसों का टीकाकरण किया जाता है। यह केंद्र प्रायोजित कार्यक्रम राज्य सरकारों के साथ मिलकर चलाया जा रहा है।

  देश के 21 राज्यों में एफएमडी टीकाकरण का चौबा चरण पूरा हो चुका है और अब तक लगभग 82 करोड़ टीके लग चुके हैं। पिछले दिनी केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेगरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2:30 ताक एफएमडी मुक्त भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की। देश के 9 राज्यों कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में सीरो-सर्विलांस के आधार पर एफएमडी फ्री जोन घोषित किए जाएंगे। जिन राज्यों में एफएमडी टीकाकरण अग्रिम चरण में है. वहां एफएमडी मुक्त क्षेत्र घोषित करने को प्राथमिकता दी जा सकती है। खुरपका मुंहपका रोग के नियंत्रण और उन्मूलन से देश में दूध उत्पादन में वृद्धि होगी, साथ ही करोड़ों किसानों की आजीविका को भी सहारा मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भी एफएमडी जैसी बीमारियों को मिटाना जरूरी है।

एफएमडी फ्री होगा हरियाणा

केंद्र सरकार जिन राज्यों को सबसे पहले एफएमडी मुक्त घोषित करने जा रही है. उनमें हरियाणा अग्रणी है। हरियाणा के पशुपालन विभाग के महानिदेशक डॉ. एल.सी. रंगा ने रूरल वर्ल्ड को बताया कि मुंहपका-खुरपका रोग (एफएमडी) और गलघोटू (एचएस) रोग के नियंत्रण के लिए राज्य में दोहरा टीकाकरण (एफएमडी एचएस) किया जाता है। ऐसा करने वाला हरियाणा देश का पहला राज्य है। साल 2019 में हरियाणा में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर मुंहखुर और गलघोंटू की कंबाइंड वैक्सीन की शुरुआत की गई थी। तब से हर छह महीने में प्रदेश के सभी गाय-भैंसों का बोहरा टीकाकरण किया जा रहा है।

  डॉ. रंगा ने उम्मीद जताई कि देश में हरियाणा पहला राज्य होगा, जिसे एफएमडी मुक्त घोषित किया जाएगा। यह राज्य में 2019 से चलाए जा रहे डबल वैक्सीनेशन अभियान का नतीजा है। यह बताते हैं कि रुबल वैक्सीनेशन का फायदा यह है कि साल में चार बार टीकाकरण की बजाय दो बार टीका लगाने से ही मुंहपका-खुरपका रोग और गलघीटू बीमारी से पशुओं का बचाव हो सकता है। हरियाणा में गायों और मैसों को इन संक्रामक रोगों से बचाने के लिए हर छह महीने के अंतराल पर उबल वैक्सीन की करीब 55 लाख डोज लगाई जाती हैं। हरियाणा में वोहरे टीकाकरण अभियान की सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार इसे अन्य राज्यों में भी लागू करने पर विचार कर रही है।

  पशुओं के टीकाकरण अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हरियाणा में जन जागरूकता के साथ-साथ वैक्सीन की उपलब्धता और कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। सेरो मॉनिटरिंग और सीरी सर्विलांस के साथ वैज्ञानिक तरीकों से पशुओं में बीमारियों की निगरानी की जा रही है। हरियाणा पशुपालन और डेयरी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023-24 में राज्य में एक करोड़ 9 लाख डबल वैक्सीनेशन किए गये। इसके अलावा ब्रूसेलोसिस, लंपी त्वचा रोग, पीपीआर, क्लासिकल स्वाईन फीवर, ईटीवी आदि टीकाकरण कार्यक्रम भी नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं। 

एलएसडी पर रोकथाम

हरियाणा के करनाल जिले में तरावड़ी के प्रगतिशील किसान विकास चौधरी बताते हैं कि पशुओं के टीकाकरण को लेकर किसानों को काफी जागरूक किया जा रहा है। पशुओं को कोई भी दिक्कत होती है तो सरकारी पशु अस्पताल और वहां के स्टाफ का सपोर्ट मिलता है। पशुपालकों में भी पशुओं की देखरेख को लेकर जागरूकता बढ़ी है।

  टीकाकरण को लेकर गांव-गांव में कैंप लगाकर पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त कई बीमारियों जैसे टी.बी., जे.डी. व ब्रुसैला के टेस्ट भी मुफ्त किए जाते हैं। इन्हीं कोशिशों के चलते पशुपालन के क्षेत्र में भी हरियाणा ने अपनी खास पहचान बनाई है। वह दिन दूर नहीं जब हरियाणा दुधारू पशुओं में होने वाले प्रमुख संक्रामक रोग को पूरी तरह मिटाकर एफएमडी मुक्त राज्य का खिताब हासिल करेगा और पशुपालन के क्षेत्र में एक लंबी लकीर खींचेगा।


Ajeet Singh

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