कृषि बजटः भविष्य पर नजर लेकिन कुछ अवसर चूके
बजट में उच्च मूल्य वाली फसलों और पशुपालन के जरिए विविधीकरण पर जोर, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने की समग्र राह नहीं
पी.के. जोशी
वर्ष 2028-27 का बजट ऐसे समय में प्रस्तुत किया गया है. है, जब वैश्विक स्तर पर असाधारण चुनौतियां मौजूद हैं। यह बजट आत्मनिर्भरता की दिशा में चल रहे प्रयासों तथा' विकसित भारत' के विजन को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है। इसका उद्देश्य सतत विकास को गति देना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और सभी क्षेत्रों में समावेशी विकास (सबका साथ सबका विकास) को प्रोत्साहित करना है। प्रमुख प्राथमिकताओं में अहम क्षेत्रों में सुधार, वित्तीय प्रणाली को सुदृढ करना तथा नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी अपनाने को प्रोत्साहन शामिल हैं।
कृषि क्षेत्र के लिए बजट में अधिक रणनीतिक फोकस की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियों में कृषि जिंसों की कीमतों में गिरावट, इनपुट सब्सिडी पर अत्यधिक निर्भरता. छोटी जोत, उत्पादन और मार्केटिंग में अक्षमताएं तथा हार्वेस्टिंग के बाद बुनियादी ढांचे की कमी शामिल हैं। इस वर्ष के कृषि बजट का आकलन पिछले बजट की निरंतरता में किया जाना चाहिए, जिसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ाने, उत्पादन में वृद्धि और वैल्यू चेन मजबूत करने के लिए कई उपाय किए गए थे। चालू वर्ष के बजट में अत्याधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने, उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और पशुपालन क्षेत्र को समर्थन देने के प्रावधान शामिल हैं। इस लेख में हमने कृषि क्षेत्र से जुड़े बजट के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों का विश्लेषण किया है। साथ ही, चूक गए कुछ अवसरों की भी पहचान की है।
एआई-संचालित कृषि मंच
बजट में घोषित पहली और सबसे महत्वपूर्ण कृषि पहल बहुभाषी, एआई पर आधारित कृषि मंच 'भारत विस्तार' (Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources) की शुरुआत है। इसका उद्देश्य आईसीएआर की कृषि पद्धतियों पर आधारित परामर्श सेवाओं के साथ एग्रीस्टैक पोर्टल को इंटीग्रेट करना है।
एग्रीस्टैक एक एकीकृत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है, जिसे कृषि क्षेत्र में दक्षता, उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। यह किसानों को तकनीक आधारित व्यक्तिगत सेवाएं उपलब्ध कराता है, जिनमें ऋण, बीमा और बाजार संबंधी जानकारी तक बेहतर पहुंच शामिल हैं। साथ ही यह सरकार की योजना और नीतिगत मामलों में डेटा-आधारित निर्णय लेने में भी सहायता करता है। इस पहल के जरिए कृषि अनुसंधान प्रणाली के एआई-आधारित समाधानों से सीधे किसानों के जुड़ने की उम्मीद है।
भारत विस्तार से किसानों को फसल से जुड़ी सलाह, मौसम संबंधी अलर्ट, कीट प्रबंधन और बाजार से जुड़ी जानकारी मिलने की उम्मीद है, जिससे यह एग्री एक्सटेंशन के लिए एक आधुनिक उपकरण के रूप में काम करेगा। एग्री एक्सटेंशन बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अनुसंधान और खेत स्तर पर अपनाई जाने वाली पद्धतियों के बीच की खाई को पाटता है। यह उत्पादकता व आय बढ़ाने वाली आधुनिक तथा टिकाऊ तकनीक को तेजी से अपनाने में भी मदद करता है।
एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने, आजीविका में सुधार, जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन में सहयोग और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाता है। अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (आईएफपीआरआई) के एक अध्ययन के अनुसार, भारत के कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) का नेटवर्क बहुत कम लागत वाला रहा है, जहां लगाए गए हर एक रुपये पर 8 से 12 रुपये का प्रतिफल मिला है। इस संदर्भ में, भारत विस्तार से कृषि समुदाय को आय बढ़ाने, जोखिम कम करने और कृषि की टिकाऊ प्रकृति को मजबूत करने में लाभ मिलने की उम्मीद है। लेखक दीर्घकाल में भारत विस्तार पहल के माध्यम से वर्चुअल केवीके के गठन की कल्पना करता है. जिससे कृषि प्रसार की लागत में बड़ी कमी आएगी और कृषि की दक्षता में सुधार होगा।
पशुधन क्षेत्र को सुदृढ़ करना
दूसरा प्रस्ताव पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने पर केंद्रित है। इसके प्रमुख प्रावधानों में शामिल हैं (1) क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी के माध्यम से वित्त तक पहुंच में सुधार, (३) किसान-उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को बढ़ावा देकर सामूहिक मॉडल को प्रोत्साहित करना, और (ब) पशुधन मूल्य श्रृंखला का विकास। इस प्रस्ताव के दोहरे उद्देश्य हैं। पहला, पैरा-वेट कॉलेजों, पशु चिकित्सालयों, प्रयोगशालाओं और प्रजनन केंद्रों को सुदृढ कर पशु चिकित्सा प्रोफेशनल्स को मजबूत करना। दूसरा, पशुधन किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन और विपणन के लिए संगठित करना।
पशुधन क्षेत्र भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख अंग है, जो कृषि उत्पादन के सकल मूल्य में लगभग 30% का योगदान देता है। 70% से अधिक लघु और सीमांत किसान इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. और केवल दुग्ध क्षेत्र ही सीधे तौर पर 8 करोड़ से अधिक किसानों को रोजगार प्रदान करता है। पूरी मूल्य श्रृंखला में पशुधन क्षेत्र को सुदृद्ध करने से न केवल लघु और सीमांत किसानों के लिए आय और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि यह स्वागतयोग्य है कि बजट में पशुधन क्षेत्र पर विशेष जोर दिया गया है, लेकिन पशु अनुसंधान, विशेष रूप से पशु स्वास्थ्य और पोषण के लिए समर्पित निधि आवंटित करके इसके प्रभाव को और अधिक बढ़ाया जा सकता था। आईसीएआर-एनआईएपी के शोध से पता चलता है कि पशुधन अनुसंधान और एक्सटेंशन में सार्वजनिक निवेश से उच्च प्रतिफल प्राप्त होता है। इसमें मार्जिनल प्रतिफल दर लगभग 40.9% है, जिससे उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि पशु विज्ञान अनुसंधान में निवेश किए गए प्रत्येक एक रुपये पर 20.81 रुपये का प्रतिफल मिलता है. जबकि पशुधन विस्तार में यह 6.17 रुपये है।
उच्च-मूल्य वाली फसलों की ओर विविधीकरण
तीसरे प्रस्ताव का उद्देश्य उच्च-मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देकर कृषि में विविधीकरण करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इसके तहत तटीय क्षेत्रों में नारियल, सुपारी, कोको, काजू और चंदन जैसी फसलों, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में अगरवुडः तथा बादाम, अखरोट और चिलगोजा जैसे प्रीमियम मेवों पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रस्ताव में पुराने बागानों के पुनर्जीवन, अधिक घनत्व वाली खेती का विस्तार और ग्रामीण युवाओं की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए समर्पित कार्यक्रम शुरू करने पर जोर दिया गया है। इस पहल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक इन उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना और उन्हें प्रीमियम वैश्विक ब्रांड के रूप में विकसित करना है। उच्च-मूल्य वाली कृषि में न केवल खेती के स्तर पर, बल्कि प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, लॉजिस्टिक्स और विपणन जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार सृजन की व्यापक संभावनाएं हैं।
इस कार्यक्रम की सफलता कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें गुणवत्तापूर्ण प्लांटिंग मटेरियल की उपलब्धता, क्षेत्र-विशिष्ट अनुसंधान और एक्सटेंशन सेवाओं का समर्थन, तथा संस्थागत ऋण और बीमा तक समय पर पहुंच शामिल हैं। इसके साथ ही हार्वेस्टिंग के बाद के इन्फ्रास्ट्रक्चर, जैसे कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण सुविधाएं और बेहतर लॉजिस्टिक्स में निवेश के साथ क्वालिटी का आश्वासन, सर्टिफिकेशन और ट्रेसेब्लिटी प्रणालियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा किया जा सके। किसान समूहों को मजबूत करना, मार्केट लिंकेज में सुधार, निर्यात सुविधा और कीमत के जोखिम का प्रबंधन तंत्र सुनिश्चित करना किसानों को संगठित वैल्यू चेन से जोड़ने और उच्च-मूल्य वाली कृषि में दीर्घकालिक वृद्धि बनाए रखने के लिए आवश्यक होगा।
विविधीकरण के संदर्भ में देखा जाए तो बजट में पूरे देश के लिए प्रमुख फलों पर फोकस किया जा सकता था, ताकि उनके उत्पादन, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और निर्यात का विस्तार हो सके। भारत में फलों और उनके मूल्य-संवर्धित उत्पादों के उत्पादन और निर्यात बढ़ाने की क्षमता अभी कम है। पहले की बजट पहलों, जैसे धन-धान्य योजना की राह पर आगे बढ़ते हुए वर्तमान बजट में आम, अमरूद, संतरा, केला सहित प्रमुख फलों के लिए समर्पित "फल-फूल योजना" शुरू की जा सकती थी, ताकि एकीकृत और वैल्यू चेन आधारित विकास रणनीति को बढ़ावा मिल सके।
अवसर जो चूक गए
इस बजट में भारतीय कृषि के सामने मौजूद चुनौतियों से निपटने के कुछ अहम अवसर चूक गए हैं। इन चुनौतियों में अधिकांश कृषि जिंसों की कीमतों में गिरावट, इनपुट सब्सिडी पर अत्यधिक निर्भरता और कृषि क्षेत्र की संरचनात्मक अक्षमताएं शामिल हैं। संरचनात्मक सुधारों की बजाय कीमत और इनपुट पर लगातार जोर दिए जाने से उत्पादकता बढ़ाने और विविधीकरण को प्रोत्साहन सीमित रह जाता है। इसके अलावा, बाजार सुधारों, हार्वेस्टिंग के बाद प्रबंधन और वैल्यू चेन विकास पर अपर्याप्त ध्यान के कारण उपज के बेहतर दाम हासिल करने की किसानों की क्षमता प्रभावित हुई है।
इनपुट सब्सिडी, खासकर उर्वरक, बिजली और सिंचाई के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए बजट में ऐसी लक्षित प्रोत्साहन योजनाएं लाई जा सकती थीं, जो अकार्बनिक उर्वरकों के उपयोग को घटाने वाली तकनीकों को बढ़ावा दें, संरक्षण कृषि को लोकप्रिय बनाएं और प्रिसीजन खेती पद्धतियों को प्रोत्साहित करें। ऐसे कदम सब्सिडी कम करने के साथ-साथ कृषि में संसाधनों के कुशल उपयोग और पर्यावरण सस्टेनेबिलिटी को भी मजबूत कर सकते थे।
दाम में अस्थिरता के जोखिम को कम करने के लिए बजट में कृषि जिंसों के लिए 'मूल्य बीमा' मॉडल विकसित करने का प्रस्ताव किया जा सकता था। हालांकि उत्पादन बीमा तंत्र पहले से मौजूद है, जो प्रतिकूल घटनाओं से होने वाले फसल नुकसान की भरपाई करता है, लेकिन मूल्य बीमा किसानों को बाजार कीमतों में तेज गिरावट से सुरक्षा प्रदान करेगा। न्यूनतम मूल्य की गारंटी देकर ऐसा तंत्र किसानों की आय में अनिश्चितता को काफी हद तक कम कर सकता है और दीर्घकाल में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का विकल्प भी बन सकता है।
कुल मिलाकर बजट भविष्य को उन्मुख है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक, उच्च-मूल्य वाली फसलों और पशुपालन के जरिए विविधीकरण पर जोर दिया गया है। हालांकि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि क्षेत्र की दक्षता सुधारने और प्राकृतिक संसाधनों की सस्टेनेबिलिटी को बेहतर बनाने के लिए और अधिक कदम उठाए जा सकते थे।
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