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किसान का भी हो अमृत काल

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Harvir Singh

भारत एक बदलाव के मोड़ पर खड़ा है। यह बदलाव है तथाकथित ‘अमृत काल’ का। वर्ष 2022 से शुरू होकर यह काल खंड 2047 में खत्म होगा, जब भारत की आजादी के 100 साल पूरे होंगे। ये 25 साल ऐसे हैं जब देश युवा कार्यबल का फायदा उठा सकता है। इससे आय और बचत बढ़ेगी तथा विकास चक्र को गति देने के लिए खपत और निवेश की दर में वृद्धि होगी। भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने के सरकार के लक्ष्य में कृषि की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह सेक्टर भारत की जीडीपी में 17 प्रतिशत योगदान करता है जबकि देश की 45 प्रतिशत वर्कफोर्स इस पर आश्रित है। ऐसे में देश को विकसित बनाने का सपना कैसे पूरा हो सकता है। लेकिन अभी तक इस बारे में नीतिगत स्तर पर न तो कोई बड़ी पहल की गई है, न कोई मंथन। सरकार में उच्च पदस्थ लोग, नीति निर्धारण के एक्सपर्ट, कॉरपोरेट, साइंटिस्ट और किसान सब मानते हैं कि किसानों की आय बढ़ाना जरूरी है। फिर भी नीति बनाते वक्त बात कृषि की होती है जबकि बात किसान की होनी चाहिए। बात उत्पादन बढ़ाने और किफायती दामों पर खाद्य उत्पाद उपभोक्ताओं को कैसे मिले, इस पर होती है लेकिन इन उत्पादों से किसान की आमदनी अधिक हो तो महंगाई के लक्ष्य आड़े आ जाते हैं। कृषि उत्पादन की बढ़ती लागत के चलते इनपुट उद्योग की कमाई बढ़ रही है लेकिन किसान की शुद्ध आय घट रही है। घरेलू बाजार में किसान को बेहतर दाम देने के लिए बनाई गई सरकारी एजेंसियां बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर दाम कम रखने पर अधिक मेहनत कर रही हैं। किसानों को प्रोटेक्शन की बजाय उपभोक्ताओं को प्रोटेक्शन देने के लिए आनन-फानन में फैसले लिये जाते हैं। ऐसे में किसान के लिए अमृत काल कैसे आएगा, यह सोचना जरूरी है। इसी पर केंद्रित है रूरल वर्ल्ड के इस अंक की कवर स्टोरी और एक्सपर्ट्स के आलेख। लोक सभा चुनावों के बाद जून में नई सरकारी बनेगी और विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए काम तेज होगा। इसमें किसान और कृषि कहीं पीछे न छूट जाए, इसलिए हमने नई सरकार के लिए एक्सपर्ट्स के जरिये संभावित नीतिगत बदलावों की एक फेहरिस्त को एजेंडा के रूप में सामने रखने की कोशिश की है। इसके लिए रूरल वर्ल्ड के सहयोगी प्रकाशन रूरल वॉयस ने ‘कृषि और किसान के लिए अमृत काल’ विषय पर भारत कृषक समाज के साथ संयुक्त रूप से एक मंथन किया जिसमें देश के नीतिगत, कॉरपोरेट, साइंटिस्ट, पर्यावरणविद, टेक्नोलॉजी, फाइनेंस और मार्केट के दिग्गजों ने अपना नजरिया और समाधान पेश किया। उनका मानना है कि किसान केंद्रित नीतियां, निवेश की जरूरत, रिसर्च और डेवलपमेंट, ढांचागत बदलाव, मार्केट और कॉरपोरेट, घरेलू और वैश्विक ट्रेड, क्लाइमेट चेंज की चुनौतियां, डिजिटाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लेकर जीएम टेक्नोलॉजी, सॉयल हेल्थ और केमिकल्स के बीच संतुलन, पानी के संतुलित उपयोग, मानव स्वास्थ्य और उपभोक्ता व किसान के आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाने पर काम करना होगा। इस मंथन के अलावा प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.एस. परोदा ने अपने आलेख में बताया है कि कृषि शोध और टेक्नोलॉजी में अमृत काल में किस तरह के कदम उठाने की जरूरत है। इंटरनेशनल ट्रेड के बड़े एक्सपर्ट डॉ. बिश्वजीत धर ने निर्यात के मोर्चे पर कृषि को लेकर नीतिगत स्थिति का आकलन किया है। किसान को कृषि नीति और फैसलों के केंद्र में रखना क्यों जरूरी है, इस पर पूर्व कृषि और खाद्य सचिव टी. नंदकुमार का आलेख भी कवर स्टोरी का हिस्सा है।

  इस अंक में हमने डेयरी क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी संस्था इंटरनेशनल डेयरी फेडरेशन के प्रेसिडेंट पियरक्रिस्तियानो ब्रेजले का एक इंटरव्यू भी शामिल किया है, जिसमें वह विश्व डेयरी बाजार में बेहतर संभवानाओं, उसमें भारत के लिए मौके और यूरोपीय यूनियन की ग्रीन डील के चलते वहां के डेयरी किसानों की मुश्किलों और संभावित बदलावों पर बात कर रहे हैं।

  ग्राउंड रिपोर्ट में निजी क्षेत्र की देश की सबसे बड़ी डेयरी कंपनी हैटसन एग्रो प्रोडक्ट लिमिटेड के तेलंगाना स्थित प्रिसीजन टेक्नोलॉजी पर आधारित और 600 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित आइसक्रीम प्लांट को कवर किया है।

  रूरल वर्ल्ड का हर अंक किसानों की आर्थिक समृद्धि की दिशा में उठाये जाने वाले कदमों, जरूरी नीतिगत मुद्दों और इस क्षेत्र में हो रहे बदलावों को पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास है। हमें उम्मीद है कि नई सरकार कृषि और सहयोगी क्षेत्र के लिए जरूरी नीतिगत बदलाव और फैसले लेकर किसान की आय में वृद्धि पर केंद्रित एजेंडा पर अमल करेगी, ताकि अमृत काल के लिए तय लक्ष्यों को हासिल करने के साथ कृषि और ग्रामीण भारत भी कदमताल कर सके।


Harvir Singh
Editor-in-Chief

रूरल वर्ल्ड पत्रिका कृषि नीति, किसानों के मुद्दों, नई तकनीक, एग्री-बिजनेस और नई योजनाओं से जुड़ी तथ्यपरक जानकारी देती है।

हर अंक में किसी अहम मुद्दे पर विशेषज्ञों के लेख, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट और समाचार होते हैं।

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