Home > Amrit Kaal For Agriculture: Way Forward > Volume 1, Issue 2

आर्या.एजी ने खींची अलग लकीर

खड़ा किया किसानों और कमोडिटी खरीदारों के व्यावहारिक विकल्प का बिजनेस मॉडल

1734851348.jpg Logo

Ajeet Singh

एग्रीटेक स्टार्ट-अप सेक्टर को अभी तक अपने पहले यूनिकार्न का इंतजार है, लेकिन इस सेक्टर का पहला आईपीओ आने में शायद अधिक समय नहीं लगेगा। एक दशक पहले अस्तित्व में आई आर्या.एजी आईपीओ लाने वाली पहली एग्रीटेक स्टार्ट-अप कंपनी हो सकती है। जिस तरह कंपनी का टर्नओवर और मुनाफा बढ़ रहा है, उसे देखते हुए उसका 100 करोड़ रुपये का मुनाफा हासिल करने और आईपीओ लाने में लंबा समय नहीं लगेगा, क्योंकि इसका जोर मर्चेंडाइज वैल्यू बढ़ाने की बजाय रेवेन्यू और मुनाफा देने वाले कारोबार को मजबूत करने पर है। कंपनी ने किसानों के बाजार तलाशने, उपज को सही समय और सही कीमत पर बेचने के साथ उसे रखने के लिए स्टोरेज इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया है। कंपनी नॉन पेरिशेबल कृषि उत्पादों के लिए देश की 10 फीसदी भंडारण क्षमता को मैनेज कर रही है। आर्या.एजी की स्थापना, फंडिंग, बिजनेस मॉडल, टेक्नोलॉजी और सर्विसेज समेत सभी मुद्दों और इसके 11 साल के सफर पर कंपनी के सह-संस्थापक एवं सीईओ प्रसन्ना राव से रूरल वर्ल्ड ने बात की और इस एग्रीटेक स्टार्ट-अप के अभी तक के महत्वपूर्ण पड़ाव और भावी योजनाओं को जानने की कोशिश की। साथ ही यह समझने की भी कोशिश की कि यह स्टार्ट-अप किसानों के आर्थिक जीवन में क्या बदलाव ला रहा है।

आर्या.एजी क्या करती है

प्रसन्ना ने बताया कि भारत में किसानों की दो प्रमुख समस्याएं हैं। पहला, फसल कब बेचें। अधिकांश किसानों को फसल कटाई के समय मजबूरी में कम भाव पर ही अपनी उपज बेचनी पड़ती है। उनके पास भंडारण क्षमता नहीं होती और तुरंत पैसों की जरूरत होती है। आमतौर पर फसल के तुरंत बाद कमोडिटी की कीमतें सबसे कम होती हैं क्योंकि अधिकांश उत्पादन उसी समय बाजार में आता है, लेकिन ऑफ-सीजन के दौरान कीमतें बढ़ जाती हैं। दूसरी समस्या है, फसल किसे बेचें। अक्सर किसान अपने आसपास के व्यापारी, कमीशन एजेंट, इनपुट डीलर या साहूकार को उपज बेचते हैं, क्योंकि उपज लेकर वे मंडी जाने के झंझट से बचना चाहते हैं और कई क्षेत्रों में मंडियां भी नहीं हैं। दोनों ही स्थितियों में किसानों को कम भाव पर उपज बेचनी पड़ती है।

प्रसन्ना के अनुसार, पहली समस्या के समाधान के लिए आर्या.एजी देश भर में मौजूद वेयरहाउस को अपने प्लेटफार्म पर लेकर आई। किसानों को आसपास के वेयरहाउस में उपज रखने पर आर्या.एजी उत्पाद की कीमत का 70 फीसदी तक लोन देती है। इससे किसान फसल कटाई होते ही तुरंत उपज बेचने के दबाव से बच जाते हैं और उन्हें जरूरत के लिए पैसा भी मिल जाता है। ऑफ सीजन में फसल बेचकर कई बार किसान 40 फीसदी तक लाभ कमा सकते हैं। इस तरह किसानों को अपना उत्पाद कब बेचना है, इसका समाधान दिया। साथ ही वेयरहाउसों की क्षमता का बेहतर उपयोग कर वेयरहाउस मालिकों को भी बिजनेस बढ़ाने में अधिक आय का मौका दिया। सामान्य रूप से वेयरहाउस की क्षमता का 40 फीसदी तक उपयोग के बिना रह जाता है, लेकिन हमने वेयरहाउस मालिकों को अपने प्लेटफार्म के साथ जोड़ कर व सीधे उनका प्रबंधन कर इसकी पूरी क्षमता का उपयोग किया है।

दूसरी समस्या के समाधान के लिए यह गोदामों में उपज रखने वाले किसानों और खरीदारों को एक प्लेटफार्म पर लेकर आई। खरीदार को माल की गुणवत्ता और जब भी डिमांड हो तब आपूर्ति का आश्वासन चाहिए। राव बताते हैं कि हमारे किस वेयरहाउस में कितना माल रखा है, यह रिकॉर्ड ऑनलाइन होता है, इसलिए खरीदारों को किसानों से जोड़ना आसान हो गया। हमारे प्लेटफार्म पर विक्रेता किसान अपनी उपज का ब्यौरा डाल देते हैं। इसी तरह खरीदार भी अपनी डिमांड बताते हैं। किसानों को उपज बेचने पर तुरंत पेमेंट चाहिए जबकि खरीदार आगे माल बेचकर ही भुगतान करने की स्थिति में होते हैं। आर्या.एजी खरीदार को क्रेडिट भी उपलब्ध कराती है। इस तरह आर्या.एजी किसानों की दो प्रमुख समस्याओं के समाधान करती है। इससे किसानों को उपज बेचने के बेहतर विकल्प मिलते हैं तो खरीदारों को भी साल भर आपूर्ति और क्वालिटी का आश्वासन मिलता है। प्रसन्ना का दावा है कि आर्या.एजी के माध्यम से किसानों की आय 20 से 30 फीसदी तक बढ़ी है। ऑफ सीजन में फसल बेचकर किसान 40 फीसदी तक बेहतर दाम हासिल कर सकते हैं।

कितना बड़ा है कारोबार

प्रसन्ना बताते हैं कि आर्या.एजी भारत का सबसे बड़ा ग्रेन कॉमर्स प्लेटफार्म है। ग्यारह हजार से अधिक वेयरहाउस और 8 लाख किसानों के अलावा 1200 एफपीओ, वित्तीय संस्थान, फूड प्रोसेसर और कमोडिटी व्यापारी इससे जुड़े हैं। इनमें से करीब तीन हजार वेयरहाउसों को आर्या.एजी खुद मैनेज करती है। इसके लिए वेयरहाउस लीज पर लेती है। इनकी कुल भंडारण क्षमता तीन करोड़ टन से अधिक है। राव का कहना है कि आज पूरे देश में जितना अनाज उत्पादन होता है, उसका लगभग तीन प्रतिशत आर्या.एजी से जुड़े वेयरहाउस में आता है। मात्रा में यह लगभग 90 लाख टन सालाना है। इनका मूल्य करीब 23 हजार करोड़ रुपये है। आर्या.एजी किसानों और एफपीओ को परामर्श सेवाएं भी उपलब्ध कराती है।

आर्या.एजी की खास बात यह है कि 11 साल पुराना यह प्लेटफार्म पहले वर्ष से ही मुनाफे में है। प्रसन्ना बताते हैं कि वर्ष 2023-24 में आर्य.एजी के माध्यम से करीब 4.5 हजार करोड़ की उपज का व्यापार हुआ। आर्य.एजी ने 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक की उपज पर करीब 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक का लोन दिया है, जिसमें एनपीए लगभग जीरो है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू पिछले वर्ष के 297 करोड़ रुपये से बढ़कर 360 करोड़ रुपये तक पहुंचा। वर्ष 2023-24 में आर्या.एजी ने 17 करोड़ का लाभ कमाया जो इससे पहले वर्ष के मुकाबले 37 फीसदी अधिक है।


कैसे हुई शुरुआत

आर्या.एजी के तीनों सह-संस्थापक प्रसन्ना राव, आनंद चंद्रा और चट्टानाथन देवराजन बैंकिंग और रूरल फाइनेंस की बैकग्राउंड से आते हैं। प्रसन्ना बताते हैं कि वेयरहाउसिंग और कोलेटरल मैनेजमेंट सर्विसेज के लिए काम करते हुए उन्होंने देखा कि ज्यादातर वेयरहाउस 15 से 20 फीसदी तक खाली पड़े रहते हैं क्योंकि उनके पास कार्यशील पूंजी के लिए फाइनेंस की सुविधा उपलब्ध नहीं होती है। दूसरी तरफ किसानों के पास उपज को कुछ हफ्तों या महीनों के लिए भंडारण कर बाद में बेहतर दाम पर बेचने की सुविधा नहीं होती है। आर्या.एजी ने इन दोनों समस्याओं के समाधान का प्रयास किया। इसमें शुरुआती सफलता उन्हें बिहार में ज्यादा मिली क्योंकि वहां मंडियों का अभाव है। इसके बाद देश के अन्य राज्यों में आर्या.एजी की सेवाओं का विस्तार किया। वेयरहाउस का नेटवर्क बढ़ने से वे किसानों को औसतन 11 किलोमीटर की दूरी पर उपज भंडारण की सुविधा मुहैया कर पा रहे हैं, जिसे और कम करने का प्रयास है।

प्रसन्ना के अनुसार आर्या.एजी ने कई राउंड में ओम्निवोर, लाइटरॉक इंडिया, क्वोना कैपिटल, एशिया इंपैक्ट आदि से फंडिंग जुटाई है। सबसे पहले 2016 में लाइटरॉक से 20 करोड़ रुपये की सीड फंडिंग ली। 2019 में ओमनीवोर ने निवेश किया और वर्ष 2020 में इसने वेंचर कैपिटल फर्म क्वोना कैपिटल से 2.1 करोड़ डॉलर की फंडिंग जुटाई थी। उसके बाद 2022 में एशिया कैपिटल व अन्य निवेशकों से 6 करोड़ डॉलर की फंडिंग प्राप्त की। मौजूदा वित्त वर्ष में भी यह फंड जुटाने की सोच रही है। यूएस इंटरनेशनल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन से भी ऋण वित्तपोषण जुटाया है।



आईपीओ पर नजर और भविष्य

फिलहाल आर्या.एजी का लक्ष्य सालाना 100 करोड़ रुपये के शुद्ध मुनाफे पर है। प्रसन्ना बताते हैं कि भविष्य में आईपीओ लाने का इरादा है। ज्यादा किसानों तक पहुंचने और देश के अनाज बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए निवेश की आवश्यकता होगी। एग्री स्टार्टअप की फंडिंग में गिरावट के ट्रेंड पर प्रसन्ना का कहना है कि अभी तक विभिन्न कंपनियों का जोर वैल्यूएशन बढ़ाने पर अधिक रहा है जबकि आर्या.एजी का फोकस कारोबारी मुनाफे और टिकाऊ व्यापार पर अधिक है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में एग्री स्टार्ट-अप भी वैल्यूएशन की बजाय टिकाऊ कारोबार पर अधिक ध्यान देंगे। यह एक सकारात्मक बदलाव है। अब निवेशकों का रुझान भी ऐसी कंपनियों की ओर बढ़ रहा है, जिनके कारोबार की बुनियाद मजबूत है और जो लाभ कमा रही हैं।

 


Ajeet Singh

रूरल वर्ल्ड पत्रिका कृषि नीति, किसानों के मुद्दों, नई तकनीक, एग्री-बिजनेस और नई योजनाओं से जुड़ी तथ्यपरक जानकारी देती है।

हर अंक में किसी अहम मुद्दे पर विशेषज्ञों के लेख, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट और समाचार होते हैं।

RNI No: DELBIL/2024/86754 Email: [email protected]