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आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर किसानों तक पहुंच बढ़ाने पर जोर

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Ajeet Singh

करनाल स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) का भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) देश में गेहूं की पैदावार बढ़ाने और किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर जोर दे रहा है। यहां विकसित गेहूं की किस्म DBW 327 (करण शिवानी) से इस साल किसानों ने प्रति एकड़ 33 क्विंटल तक की उपज ली है। देश में गेहूं और जौ अनुसंधान के साथ ब्रीडर बीज उत्पादन कार्यक्रम का समन्वय करने वाले नोडल संगठन आईआईडब्ल्यूबीआर ने पिछले कुछ वर्षों में गेहूं के क्षेत्र में खास पहचान बनाई है।

  आईसीएआर-आईआईडब्ल्यूबीआर के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने रूरल वॉयस को बताया कि फसल सीजन 2024-25 के लिए संस्थान ने निजी बीज कंपनियों और एफपीओ को गेहूं तथा जौ की किस्मों के लिए लाइसेंसिंग शुरू कर दी है। बीज कंपनियां गेहूं की DBW371, DBE372, DBW370, DBW327, DBW222, DBW187 किस्मों के टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और व्यावसायिक लाइसेंस लेने में काफी दिलचस्पी दिखा रही हैं। इससे विभिन्न राज्यों में संस्थान के उन्नत बीजों को उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। नई रिलीज की गई किस्में DBW359 और DBW377 भी एमओयू के लिए उपलब्ध हैं।

  आईआईडब्ल्यूबीआर ने वर्ष 2023-24 में गेहूं और जौ की विभिन्न किस्मों के ब्रीडर और गुणवत्ता वाले बीज का 10 हजार क्विंटल से अधिक उत्पादन किया था। संस्थान द्वारा विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य एजेंसियों को उन्नत बीजों की आपूर्ति की जाती है।

  किसानों को आसानी से बीज उपलब्ध कराने के लिए आईआईडब्ल्यूबीआर ने एक बीज पोर्टल https://iiwbr.org.in/icar-iiwbr-seed-portal विकसित किया है। इसका इस्तेमाल हरियाणा, पंजाब, यूपी, बिहार, एमपी और राजस्थान तथा अन्य राज्यों के 21,116 किसानों ने किया। पोर्टल पर पंजीकरण कराने के बाद किसान संस्थान आ कर बीज प्राप्त कर सकते हैं। पोर्टल पर किसानों के लिए बीज उगाने के बाद उसका फीडबैक देने की सुविधा भी प्रदान की गई है।

350 कंपनियों के साथ समझौते

डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि देश में गेहूं की टॉप 10 ब्रीडर सीड किस्मों में से तीन आईआईडब्ल्यूबीआर की हैं। राष्ट्रीय बीज श्रृंखला में संस्थान की 40 फीसदी हिस्सेदारी है। गेहूं की उन्नत किस्मों के तेजी से प्रसार के लिए बीज उत्पादकों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओए) पर हस्ताक्षर और कई हितधारकों के साथ साझेदारी की गई है।

  डॉ. सिंह ने बताया कि प्राइवेट बीज कंपनियां एक लाख रुपये की लाइसेंस फीस देकर आईआईडब्ल्यूबीआर के बीज का लाइसेंस प्राप्त कर सकती हैं। इसने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों की 350 निजी बीज कंपनियों के साथ 1000 से अधिक एमओए पर हस्ताक्षर किए हैं। संस्थान ने पिछले साल 212 एमओयू किए थे। गेहूं की उन्नत किस्मों के संवर्धन और साझेदारी के मामले में आईआईडब्ल्यूबीआर सफल मॉडल के रूप में उभरा है।

  ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट (एआईसीआरपी) के तहत समन्वित अनुसंधान प्रयासों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों और बदलती स्थितियों के लिए उपयुक्त 550 से अधिक गेहूं की किस्में जारी की गई हैं। इन प्रयासों से देश में गेहूं का उत्पादन 1964 में 125 लाख टन से बढ़ाकर 2022-23 तक 11.05 करोड़ टन तक पहुंचाने में मदद मिली।

जलवायु अनुकूल किस्मों पर जोर

जलवायु परिवर्तन के संकट को देखते हुए आईआईडब्ल्यूबीआर मौसम की मार झेलने में सक्षम किस्मों के विकास में लगा हुआ है। 2010 के बाद से, कुल मिलाकर 94 जलवायु अनुकूल किस्में जारी की गई हैं जिन्होंने देश की खाद्य सुरक्षा में अहम योगदान किया है। डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह बताते हैं कि आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए संस्थान ने बायोफोर्टिफाइड गेहूं की 41 किस्में जारी की हैं।

  आईआईडब्ल्यूबीआर के फार्मर कनेक्ट कार्यक्रम के तहत डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह और अन्य वैज्ञानिकों ने उन गांवों का दौरा किया जहां प्रगतिशील किसानों ने संस्थान के बीजों से बंपर पैदावार हासिल की है। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब के युवा किसान देवेंद्र सिंह उर्फ हरजीत सिंह ने गेहूं की किस्म DBW 327 (करण शिवानी) की प्रति एकड़ 33.70 क्विंटल उपज की सूचना दी। उन्हें आईआईडब्ल्यूबीआर टेक्नोलॉजी प्रमोटर 2024 का स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।


Ajeet Singh

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