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रूरल होम स्टे से बदल रहा पर्य्न लैंडस्केप

अनेक गांवों में महिलाएं कर रहीं होम स्टे का संचालन

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संजीव कंडवाल

उत्तराखंड में पर्यटन अब तक मुख्य तौर पर नैनीताल, मसूरी जैसे शहरों तक ही सीमित रहा है। लेकिन अब शहरों की चकाचौंध से दूर, गांवों में अच्छे होम स्टे उपलब्ध होने से पर्यटक दूर-दराज के गांवों में भी पहुंच रहे हैं। इससे उत्तराखंड के टूरिज्म लैंडस्कैप में अहम बदलाव आ रहा है।

 

उत्तरकाशी का मथोली गांव बना महिला सशक्तीकरण की मिसाल

 

उत्तरकाशी जनपद में पर्यटकों का रुख आमतौर पर हर्षिल वैली या मोरी-सांकरी की तरफ होता है। लेकिन चिन्यालीसौद ब्लॉक के मथोली गांव की महिलाओं ने गांव को पर्यटकों का नया ठिकाना बना दिया है। यहां होम स्टे संचालन से लेकर विलेज टूर तक महिलाएं ही संचालित करती हैं।

 

मथोली को पर्यटन गांव के रूप में बदलने का श्रेय जाता है स्थानीय युवक प्रदीप पंवार को। प्रदीप को कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान गांव लौटना पड़ा। सौभाग्य से उनके पास पर्यटन क्षेत्र में काम करने का अनुभव था। उन्होंने गांव के पास मौजूद अपनी छानी (गौशाला) को होम स्टे में बदल कर, उसे पर्यटकों के लिए खोल दिया। गांव की महिलाओं को होम स्टे संचालन का प्रशिक्षण दिया। गांव की ब्रांडिंग 'ब्वारी विलेज' के तौर पर की।

 

स्थानीय महिला अनीता पंवार बताती हैं कि गांव में अब अन्य महिलाएं भी अपनी छानियों को होम स्टे में परिवर्तित करने के लिए आगे आई हैं। प्रदीप बताते हैं कि उन्होंने अपने होम स्टे को पर्यटन विभाग में पंजीकृत करवा दिया है, जिससे वे ऑनलाइन बुकिंग भी ले सकते हैं। उन्होंने 8 मार्च 2022 को अपने होम स्टे की शुरुआत की थी। तब से करीब एक हजार पर्यटक आ चुके हैं।

 

रुद्रप्रयाग के सारी गांव में 50 होम स्टे

 

रुद्रप्रयाग जिले में तुंगनाथ, चोपता ट्रैक पर मौजूद सारी गांव उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रामीण पर्यटन और स्वरोजगार की मिसाल कायम कर रहा है। गांव में इस वक्त करीब 50 होम स्टे संचालित हो रहे हैं, जिसमें ढाई सौ से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।

 

सारी गांव में होम स्टे की शुरुआत 1999 में माउंटेन गाइड मुरली सिंह नेगी ने की। यहां वर्ष भर पर्यटकों की आवाजाही रहती है, इसलिए अन्य लोगों ने भी अपने परम्परागत घरों के दरवाजे पर्यटकों के लिए खोल दिए। वर्तमान में यहां होम स्टे की संख्या 50 तक पहुंच गई है, जिसमें से 41 पर्यटन विभाग के पास पंजीकृत हैं। कई लोगों ने प्रदेश सरकार की दीन दयाल उपाध्याय पर्यटन होम स्टे योजना के तहत भी होम स्टे शुरू किए हैं। स्थानीय ग्रामीण जीएस भट्ट बताते हैं कि गत वर्ष गांव में करीब सात हजार पर्यटक आए।

 

मुख्यमंत्री धामी ने भी किया विश्रामः दिसंबर में : रुद्रप्रयाग जिले के दौरे पर पहुंचे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भी सारी गांव पहुंच कर होम स्टे में रात्रि विश्राम किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने गांव में पर्यटन और स्वरोजगार के मॉडल की सराहना करते हुए कहा कि इससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलेगी। रुद्रप्रयाग से सारी गांव की दूरी लगभग 50 किलोमीटर है।

 

पर्यटन विभाग के पास इस समय 5331 होम स्टे पंजीकृत हैं, जिनमें से ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं ही संचालित करती हैं। सरकार पंडित दीन दयाल उपाध्याय होम स्टे योजना के तहत होम स्टे की लागत पर मैदानी क्षेत्र में 25% और पहाड़ी क्षेत्र में 33% सब्सिडी देती है।


संजीव कंडवाल

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