ग्रामीण भारत को बुनियादी ढांचे और सेवाओं का इंतजार
पांचक्षेत्रीय सम्मेलनों में हुई व्यापक चर्चा और उनसे मिली अंतर्दृष्टि ने सामूहिक रूप से ग्रामीण भारत के लिए एजेंडा तैयार करने की नींव रखी।
Jonathan Donald Syiemlieh
पांचक्षेत्रीय सम्मेलनों में हुई व्यापक चर्चा और उनसे मिली अंतर्दृष्टि ने सामूहिक रूप से ग्रामीण भारत के लिए एजेंडा तैयार करने की नींव रखी। इसमें ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और क्षमता को बढ़ाने की आवश्यकता प्रमुखता से उजागर हुई। यह अनिवार्यता स्वास्थ्य और शिक्षा, परिवहन और ऊर्जा पहुंच सहित विभिन्न क्षेत्रों के लिए है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी की चुनौतियों से संबंधित निष्कर्षनिम्नलिखित हैं।
ग्रामीण रोड नेटवर्कः
सम्मेलन में इस मुद्दे पर कराए गए मतदान के दौरान एक चौथाई से अधिक प्रतिभागियों ने मेघालय के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क, फुटपाथ, स्ट्रीट लाइट और जल निकासी व्यवस्था में सुधार के महत्व पर जोर दिया। मेघालय और उत्तर प्रदेश दोनों जगहों पर मतदान के परिणाम में सर्वसम्मति से खेतों और कृषि मंडियों को परिवहन सुविधाओं से जोड़ने की व्यवस्था करने के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सड़कों का बुनियादी ढांचा बढ़ाने की साझा मांग पर प्रकाश डाला गया।
स्वास्थ्य अवसंरचनाः
ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति का लाखों ग्रामीणों के जीवन और आजीविका पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उत्तर प्रदेश और मेघालय दोनों जगहों पर प्रतिभागियों ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे की अपर्याप्तता और उनके ठीक से काम नहीं करने पर भी चिंता जताई। उत्तर प्रदेश, ओडिशा और मेघालय में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने कहा कि वे अपना नेता चुनते समय देखेंगे कि अच्छी सुविधाओं से सुसज्जित, सस्ती और आसानी से सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं को पूरा करने के वादे उन्होंने पूरे किए हैं या नहीं।
शिक्षा अवसंरचनाः
ग्रामीण भारत में बुनियादी शैक्षिक ढांचे की स्थिति सीधे तौर पर गुणवत्तापूर्णशिक्षा तक पहुंच और विस्तार देश के सामाजिक-आर्थिक विकास को प्रभावित करती है। मुजफ्फरनगर के एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ग्रामीण युवाओं को पर्याप्त कौशल और तकनीकी शिक्षा नहीं मिलती है। ओडिशा, राजस्थान, मेघालय और उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बिगड़ रही है। मेघालय में पूर्वी खासी हिल्स के एक प्रतिभागी ने कहा कि प्राथमिक से माध्यमिक विद्यालय तक बीच में ही पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों की दर अधिक है। इसके अलावा, कृषि से संबंधित व्यावहारिक कौशल प्रदान करने पर अपर्याप्त ध्यान दिया गया है। ओडिशा में मौजूद लोगों के चुनावी वादे मुख्य रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों की शिक्षा को बढ़ावा देने पर केंद्रित थे। मेघालय में ज्यादातर प्रतिभागियों ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे से संबंधित चुनावी वादों और कॉलेज स्तर तक उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा में एकरूपता प्रदान करने की अपनी प्राथमिकता जताई।
ऊर्जा अवसंरचनाः
मेघालय, तमिलनाडु और ओडिशा के ग्रामीण निवासियों ने बताया कि बिजली कटौती और लोड शेडिंग का उनके दैनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने 24 घंटे लगातार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के उपाय लागू करने पर बल दिया। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के एक किसान ने बिजली की बढ़ती दरों को चिंता का कारण बताया। ओडिशा में प्रतिभागियों ने कहा कि वे ऐसे नेताओं को वोट देंगे जो जीवाश्म ईंधन पर उनकी निर्भरता को कम करने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, विशेष रूप से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद करेंगे। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा बुनियादी ढांचे का संतुलित, समावेशी और सतत विकास प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
निष्कर्षः
स्थानीय समुदायों, किसानों, शिक्षकों, कारीगरों और अन्य लोगों द्वारा साझा की गई अंतर्दृष्टि ने ग्रामीण भारत के बुनियादी ढांचे के एजेंडे को आकार देने में अमूल्य योगदान दिया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, ऊर्जा जैसे आवश्यक क्षेत्रों में निवेश करके हम न केवल तत्काल जरूरतों को पूरा करते हैं बल्कि परिवर्तनकारी कदमों की एक श्रृंखला भी शुरू करते हैं जो ग्रामीण समुदायों के कल्याण पर गहरा प्रभाव डालते हैं।
प्रति युवाओं में जागरूकता बहुत जरूरी है।” - एक प्रतिभागी। 2016 में हिंदी फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ ने पंजाब में ड्रग्स की समस्या पर फोकस किया था। 2023 में ऐसा लगता है कि ड्रग्स का इस्तेमाल शहरी अभिजात वर्ग और पंजाब तक ही सीमित नहीं है। भुवनेश्वर हो या जोधपुर, हर जगह हमें यह सुनने को मिला कि समाज के हर वर्ग में बड़ी संख्या में युवा ड्रग्स ले रहे हैं। शराब ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से प्रमुख समस्या रही है। मेघालय, तमिलनाडु और ओडिशा में यह समस्या हमें अब भी सुनने को मिली। हालांकि ड्रग्स का पूरे देश में बढ़ता इस्तेमाल देख लगता है मुख्यधारा की मीडिया की नजरों में यह नहीं आया। गहरी समझ के अभाव में कोई इसके अलग-अलग कारण सोच सकता है। जैसे, क्या यह बेरोजगारी के कारण है, क्या यह इस वजह से है कि लोकप्रिय गाने और मीडिया इसे ‘कूल’ और स्वीकार्य बताने लगा है, या फिर ड्रग्स आसानी से मिलने लगे हैं? बेरोजगारी, सामाजिक संस्थाओं की कमी, लोगों की बढ़ती चाहत और उस हिसाब से ड्रग्स की उपलब्धता के कारण यह पूरे देश में महामारी की तरह फैल गई है।
ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर अब भी बुनियादी सेवाएं उपलब्ध कराने में असमर्थ
लोग अब भी अच्छी क्वालिटी के बुनियादी इन्फ्रास्ट्रक्चर का इंतजार कर रहे हैं। मेघालय के गारो, खासी और जैंतिया समुदाय के लोगों को अभी तक आने-जाने अथवा सामान ले जाने के लिए अच्छी सड़कें नहीं मिली हैं। रोड कनेक्टिविटी बढ़ी तो है, लेकिन वह अपर्याप्त है। जहां सड़क है वहां सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट नहीं है। यही स्थिति बिजली की है। ग्रामीण भारत में पूरे दिन बिजली की सप्लाई आज भी सपना है। आज के युग में इंटरनेट का लगातार कनेक्शन मिलना भी आवश्यक है। राजस्थान के बालोतरा के एक किसान को अभी तक पीने के लिए साफ पानी का इंतजार है। देश के दूसरे छोर पर स्थित मेघालय के लोगों की भी यही स्थिति है, जो नल का कनेक्शन चाहते हैं। मुजफ्फरनगर में किसानों के पास पानी तो है, लेकिन उनकी चिंता भूजल में मिल चुके रसायनों और धातुओं के जहरीले प्रभाव को लेकर है। गांव में शिक्षा की बात आती है तो अक्सर लोगों को लगता है कि वे पीछे छूट गए हैं। सरकारी और निजी स्कूलों के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है। लोग अच्छी सार्वजनिक शिक्षा चाहते हैं, लेकिन जहां स्कूल है वहां शिक्षकों की संख्या पर्याप्त नहीं। सरकारी स्कूलों के बारे में धारणा है कि वे गुणवत्तापूर्णशिक्षा नहीं दे सकते। अच्छी सेहत और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत भी हर जगह लोगों में बढ़ती दिखाई दी। जीवन शैली से जुड़ी बीमारियां बढ़ने के साथ लोग बेहतर इलाज की मांग करने लगे हैं, लेकिन मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल गांव से काफी दूर हैं। स्थानीय स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर में अनेक खामियां हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र पर्याप्त नहीं और वहां दवाई और उपकरण भी नहीं मिलते। एक प्रतिभागी के अनुसार, “हम अपने गांव में स्वच्छ वातावरण चाहते हैं, वहां आराम करने की जगह हो, खेल का मैदान हो, व्यायाम करने की सुविधा हो।”
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