कृषि और किसानों के लिए बड़ी पहल
घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था नई चुनौतियों का सामना कर रही है। चुनौतियां पहले भी आईं, लेकिन हाल के वर्षों में कोविड संकट ने ऐसी स्थिति पैदा की थी, जिसने देश की सामाजिक और आर्थिक दोनों मोर्चा पर परीक्षा ली। उस संकट से उबरने में सबसे बड़ी मजबूती कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने दी। देश में खाद्य सुरक्षा का कोई संकट नहीं हुआ क्योंकि उस कठिन दौर में भी कृषि उत्पादन और संबद्ध गतिविधियां लगभग सामान्य रहीं। भरे हुए खाद्यान्न भंडारों के चलते सरकार बड़ी आबादी को मुफ्त भोजन उपलब्ध करा सकी।
हरवीर सिंह
घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था नई चुनौतियों का सामना कर रही है। चुनौतियां पहले भी आईं, लेकिन हाल के वर्षों में कोविड संकट ने ऐसी स्थिति पैदा की थी, जिसने देश की सामाजिक और आर्थिक दोनों मोर्चा पर परीक्षा ली। उस संकट से उबरने में सबसे बड़ी मजबूती कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने दी। देश में खाद्य सुरक्षा का कोई संकट नहीं हुआ क्योंकि उस कठिन दौर में भी कृषि उत्पादन और संबद्ध गतिविधियां लगभग सामान्य रहीं। भरे हुए खाद्यान्न भंडारों के चलते सरकार बड़ी आबादी को मुफ्त भोजन उपलब्ध करा सकी।
कृषि क्षेत्र की बढ़ती गतिविधियां यह संकेत देती हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था की गति तेज करने में कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की भूमिका लगातार अहम होती जा रही है। जब भारत पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य साध रहा है, तो उसमें से एक ट्रिलियन डॉलर कृषि और संबद्ध क्षेत्रों से ही आने की उम्मीद है। लेकिन यह मौजूदा स्थिति से संभव नहीं होगा। इसके लिए कृषि और संबद्ध क्षेत्रों को मजबूत करने हेतु नीतिगत सुधार, टेक्नोलॉजी तक पहुंच, निवेश और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ानी होगी।
इसी संदर्भ में एक बड़ी पहल हुई है विकसित कृषि संकल्प अभियान। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के साथ सरकार का संवाद स्थापित करने और वैज्ञानिकों, नीति-निर्धारकों और किसानों के बीच की दूरी कम करने के उद्देश्य से इस राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है। इसका पहला चरण मई-जून में चला, जिसमें 60,000 से अधिक कार्यक्रमों के जरिए एक लाख से अधिक गांवों के 1.35 करोड़ किसानों ने भाग लिया। सभी एग्रो क्लाइमेटिक जोन और प्रमुख फसलें इस दौरान कवर की गईं। खरीफ सीजन के बाद अब अक्टूबर में रबी सीजन के लिए भी इसी तर्ज पर अभियान चलेगा।
हालांकि इस अभियान के ठोस नतीजे आने में समय लगेगा, लेकिन इसने किसानों को सीधे वैज्ञानिकों और नीति-निर्धारकों से जोड़कर कृषि और किसानों के मुद्दों को जमीनी स्तर से सामने लाने का काम किया है। इससे सरकार को इन विषयों पर प्राथमिकता तय करने का अवसर मिला है। साथ ही, किसानों और सहयोगी क्षेत्रों में यह भरोसा भी पैदा हुआ है कि उनकी समस्याएं और सुझाव सीधे सरकार तक पहुंच रहे हैं। इस तरह, सरकार और किसानों के बीच का जो गैप था, उसे इस अभियान ने कम किया है। साथ ही, उठाए गए मुद्दों पर समाधान और क्रियान्वयन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। कृषि मंत्री की यह पहल निश्चित रूप से कृषि को मजबूती देगी और देश की अर्थव्यवस्था में उसकी अहमियत को स्थापित करेगी। चूंकि कृषि राज्यों का विषय है, इस अभियान ने केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल को भी मजबूत करने में मदद की है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की विकसित कृषि संकल्प अभियान के पीछे की सोच और कृषि व किसानों के मुद्दों पर उनके कदमों के बारे में रूरल वर्ल्ड ने एक विस्तृत इंटरव्यू किया है जो इस अंक की कवर स्टोरी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में दूसरा बड़ा कदम है 23 साल बाद जारी की गई राष्ट्रीय सहकारिता नीति 2025। स्वतंत्रता से पहले शुरू हुए सहकारिता आंदोलन का सबसे बड़ा लाभ अगर किसी क्षेत्र को हुआ है, तो वह है कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था। इसने किसानों की सामूहिक शक्ति को एक मजबूत आर्थिक विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया। हमारे पास अमूल, इफको और अन्य सफल उदाहरण मौजूद हैं, लेकिन कई असफलताएं भी सामने आई हैं।
ऐसे में मौजूदा सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए नई सहकारिता नीति में पारदर्शिता, बेहतर गवर्नेस, टेक्नोलॉजी का उपयोग और प्रोफेशनल मैनेजमेंट जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जो कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकते हैं। प्राथमिक सहकारी समितियों को बहुउद्देश्यीय बनाकर कृषि से परे विविध व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल करने से नई पीढ़ी को सहकारिता से जोड़ने का रास्ता खुलेगा। हालांकि, इस नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसका क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है और राज्यों द्वारा इसमें कितना सहयोग मिलता है. क्योंकि प्राथमिक सहकारी समितियां राज्यों के अधीन आती हैं।
रूरल वर्ल्ड के इस अंक में नई सहकारिता नीति पर विस्तृत लेख और देश में सहकारिता मंत्रालय बनने पर पहले सहकारिता सचिव रहे तथा मौजूदा समय में कोऑपरेटिव इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरमैन देवेंद्र कुमार सिंह का दृष्टिकोण शामिल है। साथ ही, इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस (एशिया पैसिफिक) के प्रेसिडेंट और कृभको के चेयरमैन डॉ. चंद्रपाल सिंह के साथ नई नीति और इंटरनेशनल ईयर ऑफ कोऑपरेटिव्स 2025 पर विशेष बातचीत भी प्रस्तुत की गई है।
मुझे आशा है कि रूरल वर्ल्ड का यह अंक हमारे पाठकों के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक साबित होगा।
RNI No: DELBIL/2024/86754 Email: [email protected]