रुरल वॉयस और किसान सशक्तीकरण के पांच साल
रूरल वॉयस अपने उद्देश्यों को लेकर शुरुआत से ही स्पष्ट है। यही वजह है कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े तमाम मुद्दों पर इन पांच वर्षों में देशभर में चर्चा और कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं।
हरवीर सिंह
पांच साल पहले देश के किसान और ग्रामीण क्षेत्र को सूचनाओं और नीतिगत हस्तक्षेप के जरिये सशक्त करने की जिस उम्मीद के साथ, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर केंद्रित डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म के रूप में हमने रूरल वॉयस की शुरूआत की थी, उसका एक अहम पड़ाव हमने पार कर लिया है। हमने खबरों के साथ ही टेक्नोलॉजी और नीतिगत फैसलों और कृषि बाजार से जुड़े घटनाक्रम को हिंदी में ruralvoice.in और अंग्रेजी में eng.ruralvoice.in के जरिये डिजिटल रूप में अपने लक्षित पाठकों तक पहुंचाया। उन घटनाक्रमों को ruralvoicein यूट्यूब चैनल के जरिये वीडियो रूप में दर्शकों तक पहुंचाने की यात्रा भी काफी उत्साहवर्धक रही। डिजिटल रूप के साथ, दो साल पहले रूरल वॉयस के प्रिंट प्रकाशन रूरल वर्ल्ड को भी इस यात्रा में जोड़ा गया। यह द्विभाषी पत्रिका हिंदी और अंग्रेजी के पाठकों में कृषि व सहयोगी क्षेत्र पर प्रस्तुत किये जा रहे लेखों, रिपोर्ट्स और साक्षात्कारों के जरिये अपनी विशिष्ट पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।
रूरल वॉयस अपने उद्देश्यों को लेकर शुरुआत से ही स्पष्ट है। यही वजह है कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े तमाम मुद्दों पर इन पांच वर्षों में देशभर में चर्चा और कॉन्फ्रेंस आयोजित की गईं। सभी हितधारकों किसान, ग्रामीण नागरिक, सरकारी पदाधिकारी, राजनीतिज्ञ, नीति विशेषज्ञ, वैज्ञानिक और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया गया। यह सतत प्रक्रिया विभिन्न मुद्दों पर हितधारकों के विचारों को लोगों के बीच लाने का काम करती रहेगी। इन पांच वर्षों के दौरान हमारी कई बड़ी खबरें और विश्लेषण अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहे। रूरल वॉयस की टीम विशिष्टता और विश्वसनीयता को बरकरार रखने को सबसे अधिक प्राथमिकता देती है। इन्हीं विशिष्टताओं के साथ रूरल वर्ल्ड का यह अंक एक और बदलाव का साक्षी बन रहा है। दिसंबर-जनवरी के इस अंक के साथ रूरल वर्ल्ड त्रैमासिक से द्विमासिक पत्रिका में तब्दील हो रही है। अब हर दो माह में रूरल वर्ल्ड का अंक आप तक पहुंचेगा। यह हमारी सधी और निर्दिष्ट विस्तार प्रक्रिया का हिस्सा है।
हमारे इस गौरवशाली पांच साल के पड़ाव को पार करने के साथ ही सरकार कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव लाने की ओर बढ़ रही है। करीब 60 साल बाद देश में नया बीज अधिनियम 2025 लाया जा रहा है। यह अधिनियम अभी ड्राफ्ट स्तर पर है और इस पर संबंधित हितधारकों की प्रतिक्रिया व सुझाव मांगे गये हैं। इन सुझावों के बाद बीज विधेयक 2025 संसद में पेश होगा और वहां पारित होने के बाद नये कानून की शक्ल में बीज अधिनियम, 1966 का स्थान लेगा। इस कानून को लेकर देश के किसानों, वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों, नीति विशेषज्ञों और उद्योग व व्यापार जगत में गहन मंथन चल रहा है। रूरल वर्ल्ड के इस अंक की कवर स्टोरी हमने इस बीज अधिनियम, 2025 को ही बनाया है। हमने अपने पाठकों को इस विधेयक की समग्रता के साथ उसके प्रावधानों और विभिन्न हितधारकों के लिए उनके प्रभावों को समझाने की कोशिश है। इसके लिए तमाम विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की गई है।
इस अंक में हमने नई प्रजातियां विकसित करने की नवीनतम तकनीक, जीन एडिटिंग को समझाने की भी कोशिश की है। इस विषय पर जीन एडिटिंग तकनीक का उपयोग कर नई प्रजाति विकसित करने वाले कृषि वैज्ञानिकों के आलेख हैं। देश के वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग की स्वदेशी तकनीक विकसित की है। उस तकनीक से कृषि क्षेत्र को किस तरह के फायदे हो सकते हैं, उसके बारे में भी इस अंक में बताया गया है।
रूरल वॉयस मीडिया प्लेटफॉर्म के सभी प्रकार डिजिटल, वीडियो, प्रिंट और कॉन्फ्रेंस पूरी तरह से किसान और कृषि क्षेत्र के हितधारकों के लिए समर्पित हैं। हमारी यह राह पाठकों के भरोसे पर ही आगे बढ़ रही है। आशा है कि हम उम्मीद और सशक्तीकरण के जिस विचार को लेकर चले हैं उसमें आपका साथ हमें मिलता रहेगा और उत्साहवर्धन करता रहेगा ताकि रूरल वॉयस के फुटप्रिंट को उन सभी स्थानों तक ले जाया जा सके जहां वह अभी नहीं है।
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